अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है? || Motivational story 2

अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है? || Motivational कहानी
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दोस्तों,

इस कहानी से हम लोग यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है और इसका हल क्या है?

मतलब जब हमारे साथ कुछ बुरा हो रहा हो उस वक्त हमें क्या करना चाहिए?

जब स्वामी विवेकानंद जी ने यही प्रश्न अपने गुरु जी से पूछा कि अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है तो उनका जवाब क्या था

दोस्तों, हमारे साथ जिंदगी में जब भी बुरा होता है हम लोग अक्सर यह सोचने बैठ जाते हैं की यह सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है? मैं इतना अनलकी क्यों हूं? 

यानि हम खुद को ही इन सब के लिए दोषी मानना शुरू कर देते है और तो और बहुत बार हम लोग भगवान से ही प्रश्न करना शुरू कर देते है की मैंने तो सारे ही अच्छे काम किए हैं, कभी किसी का बुरा नहीं किया, लेकिन फिर भी भगवान मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता हैं?

अच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है? || Motivational कहानी

चलिए आते हैं कहानी पर-

Motivational Storyअच्छे लोगों के साथ बुरा क्यों होता है?

एक बार एक गांव में एक बहुत भला व्यक्ति रहता था | वह व्यक्ति कृष्ण भक्त था | कभी किसी का बुरा नहीं करता था और ना ही कभी किसी का दिल दुखता था |

वह हर रोज भगवान के मंदिर में प्रार्थना करके, भगवान से आशीर्वाद लेकर अपने काम पर जाता था |  इस व्यक्ति के आसपास के सभी लोग इससे बहुत ही खुश थे और इसकी पूरे शहर में बहुत इज्जत थी |

वहीं उसी गांव में एक बहुत ही घटिया आदमी भी रहता था | वह भी उसी मंदिर में उसी समय जाता था, जिस समय भला व्यक्ति मंदिर जाता था | पर वह मंदिर में आकर भी लोगों को और जानवरों को दुखी करता था |

वह जानवरों पर पत्थर मारा करता था, वह जुआ खेलता था और शराब पीना तो उसका रोज का काम था | जहां पर भले व्यक्ति के जीवन का मत्र था सुबह जल्दी उठकर, मंदिर होकर और प्रभु का नाम जप कर आगे बढ़ता जा,  वहीं इस नीच व्यक्ति का भी एक जीवन मंत्र था और वह था सुबह जल्दी उठकर मंदिर नंगे पांव जाकर, चप्पल उठा कर ला | नीच व्यक्ति मंदिर में भी चोरी करने से बाज नहीं आता था और लोगों की चप्पलें तक उठा कर चंपत हो जाता था |

एक दिन खूब बारिश हो रही थी और मंदिर में कोई भी नहीं आया था | नीच व्यक्ति ने देखा मंदिर में तो कोई भी नहीं है | बस इस बात का फायदा उठाते हुए, पंडित जी की नजरों से बचते-बचते, वह मंदिर में रखे सारे पैसे लेकर चंपत हो गया |

थोड़ी देर बाद अपनी दिनचर्या के अनुसार वह भला व्यक्ति भी मंदिर में आ गया और इस चोरी का इल्जाम इस भले व्यक्ति पर लग गया |

लोगों ने भले व्यक्ति को खूब जलील किया, खूब फटकारा, कोई कहता बुलाओ पुलिस, देखने में तो बहुत भला लगता है और और कर रहा है चोरी और वह भी मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर, शर्म आनी चाहिए इस नीच इंसान को, बुलाओ पुलिस को |

बहुत मिन्नतें करने के बाद भला व्यक्ति किसी तरह मंदिर से बाहर आया और जैसे ही अगले चौक पर पहुंचा एक बड़ी तेजी से आती हुई कार भले व्यक्ति को ठोक कर भाग गई |

उसको कुछ चोटें आई, लेकिन टक्कर के दौरान किसी तरह कार में से एक बैग गिर कर बाहर आ गया | कार वाले ने डर के मारे बैग उठाया ही नहीं क्योंकि कार वाले को वहां से भागने की जल्दी थी | 

गलती कार वाले की थी, उसने व्यापारी को गिरा दिया था | नीच इंसान पास ही खड़ा सब कुछ देख रहा था | उसने काफी शराब पी पी रखी थी | उसने इस बैग को जल्दी से लपक लिया |

उस नीच व्यक्ति ने जैसे ही बैग खोल कर देखा तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह बैग पैसो से भरा हुआ था उसे पाकर वह खुशी के मारे उछल पड़ा और चिल्लाने लगा |

“आज तो खूब मालामाल हो गया | पहले सुबह मंदिर से माल मिला और फिर पैसों से भरा बैग, मेरी तो लॉटरी लग गई | “

यह सुनकर भला व्यक्ति सारा खेल समझ गया | भला व्यक्ति उस समय तो चुप ही रह गया | घर पहुंचकर उसने गुस्से में भगवान की सभी तस्वीरों को उतार दिया | आज भले व्यक्ति की जिंदगी का सबसे बुरा दिन था |

भले व्यक्ति ने अपनी बीवी और बच्चों को बुलाकर चिल्ला कर कहा ” खबरदार आज से इस घर में किसी ने भी भगवान का नाम लिया | कोई भगवान नहीं है, इस दुनिया में सब पाखंड है, भगवान जैसी कोई चीज होती ही नहीं है, और अगर भगवान् होते तो इतना भी नहीं देख पाते कि मैं चोर नहीं हूं, और वह पाखंडी इंसान चोर है | “

” मैंने कभी किसी का बुरा नहीं किया और मेरी जिंदगी में इतना जहर और उस नीच इंसान के लिए पैसों से भरा बैग, घोर अन्याय है |”

उस कृष्ण भक्त का दिल पूरी तरह से टूट चुका था | रात का खाना बिना खाए ही अपने सोफे पर लेट गया और काफी देर लेटे रहने पर उसको नींद आ गई |

अब उसको दर्शन दिए भगवान ने | भगवान ने उसको सपने में आकर बताया “आज तेरी जिंदगी का आखिरी दिन था | आज तेरी मौत होने वाली थी, क्योंकि पिछले जन्म में ऐसे तूने भी राह चलते लोगो पर जानबूझकर गाड़ी चला दी थी और उन सबकी मौत हो गई थी | जिसके फलस्वरूप आज तेरी जिंदगी का आखरी दिन था |”

” और उस नीच व्यक्ति के पिछले जन्मों के कारण उसको राज मिलना था, लेकिन उसके इस जन्मों के बुरे कर्मों के कारण उसको कुछ पैसे ही मिले |”

दोस्तों, इस कहानी से हमें सीख मिलती है की हमें जिंदगी में दुख और तकलीफ जितनी भी मिलती रहे, हमें अपने परमात्मा में अपना विशवास नहीं खोना चाहिए, और अगर हमारे साथ कुछ बुरा हो रहा है और हम अपने कर्मों को सही रखते हैं तो हमारे साथ इतना बुरा नहीं होगा, जितना बुरा होना था | हमारे कर्म ही हमारा भविष्य लिखते हैं और कर्मों का फल हमें मिलता है |

और हां दोस्तों, स्वामी विवेकानंद जी ने भी यही प्रश्न अपने गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस से किया था कि अच्छे लोग जिंदगी में परेशान क्यों रहते हैं ?

रामाकृष्ण परमहंस जी ने जवाब में कहा था की हीरा रगड़ खाए बिना चमकता नहीं है और सोना तपे बिना तरश्ता नहीं है | अच्छे लोग दुख नहीं भोगते वह तो भगवान की परीक्षा देते हैं और यह जिंदगी के तजुर्बे ही हैं जो लोगों को बेहतर बनाते हैं |

फिर स्वामी विवेकानंद जी ने सवाल किया था कि ” क्या आप कहना चाहते हैं की ये तजुर्बे अच्छे है ?”

तो रामाकृष्ण परमहंस जी ने जवाब में कहा था ” हां यह तजुर्बे एक टीचर की तरह है | जिंदगी तुम्हें पहले एक टेस्ट देती है और फिर एक Lesson देकर जाती है |”

दोस्तों, कितनी सच्चाई है इस बात में पहले तो जिंदगी टेस्ट देती है और फिर देकर एक Lesson देकर जाती है |

इसके बाद स्वामी विवेकानंद जी ने सवाल किया “इतनी कठिनाइयों को संभाल पाना भी मुश्किल हो रहा है|”

रामकृष्ण परमहंस ने जवाब दिया “आंखें केवल दृश्य देखती है दिल रास्ता बताता है इसलिए अपने अंदर झांक कर देखो, परेशानी का हल बाहर से नहीं अंदर से मिलेगा |”

स्वामी विवेकानंद जी ने सवाल किया “क्या असफलता दुख नहीं देती ?”

इस पर रामाकृष्ण परमहंस ने जवाब दिया “सफलता या असफलता दूसरे देखते हैं, इंसान खुद तो केवल अपनी संतुष्टि देखते हैं |”

और फिर स्वामी जी ने वो सवाल किया जो अक्सर लोग करते हैं “हम हर पल मोटिवेटेड कैसे रह सकते हैं ?”

रामकृष्ण परमहंस जी बताते हैं ” हरदम यह देखो तुम कितनी दूर आ चुके हो, यह मत देखो कितनी दूर जाना है | भगवान ने जो भी चीजें तुम्हें दी है, उन चीजों की ओर देखो और जो नहीं दिया उसके लिए मत रोवो |”

रामकृष्ण परमहंस बताते हैं ” मुझे यह चीज बहुत हैरान करती है, लोग दुख मिलने पर यह पूछते हैं मैं ही क्यों ?  और सुख मिलने पर कोई नहीं पूछता मैं ही क्यों ?”

और दोस्तों, यहां पर भी हम रामकृष्ण परमहंस जी की बताई गई बात पर ही conclude कर रहा हूं |

“अतीत का सामना करो बिना किसी पछतावे के

वर्तमान का सामना पूरे साहस के साथ करो और भविष्य के लिए बिना डरे तैयार रहो “

दोस्तों, यह जानकारी उन सभी के लिए है जो इस समय परेशानी से जूझ रहे है |

हम उम्मीद करते है की यह जानकरी उन सभी को कुछ हौसला देगी |

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