को उबालना क्यों चाहिए ?

 

प्राचीन काल से मनुष्य का प्रिय पेय रहा है | को शास्त्रों ने पृथ्वीलोक का अमृत कहा है | विशेषत: इसीलिए रसायन जीवनी है | अतः यह शरीर की रोग प्रतिकारक शक्ति बढ़ा कर शरीर को सदा रोग मुक्त रखता है | 
में विटामिन सी को छोड़कर शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व, विटामिन होने से है | 

सभी प्रकार के में माता का सर्वोत्तम गिना जाता है | माता के के बाद दूसरे क्रम में गाय का है | बीमार व्यक्ति के लिए गाय का सर्वोतम खाद्य है | औषधि एवं पथ्य के रूप में भी गाय का सर्वश्रेष्ठ है | अनेक रोगों में इसका उपयोग होता है अतः सब प्राणियों के में गाय का श्रेष्ठ माना जाता है | 

सामान्यता सभी के लिए अनुकूल रहता है तथापि गैस  या मंद पाचन की शिकायत वालों को सौंफ, इलायची, पीपलामूल, जैसे पाचक मसाले डालकर उबाला हुआ लेना चाहिए | थोड़ी सी पीपर या सौंठ डालने से वह अग्नि प्रदीप्त तथा वातहर बनता है | तथापि कमजोर या रोगी मनुष्य को दिया जाने वाला ज्यादा उबाल कर काढ़ा ना बनाये | यदपि को ज्यादा उबालने से उसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं और गरिष्ठ हो जाता है, फिर भी उसकी वायु प्रकृति को कम करने के लिए और उसको जंतु रहित करने के लिए उसे उबालना हितावह रहता है | 

छोटे बच्चों तथा मंद पाचन शक्ति वालों को देना हो तो उसमें तीसरे हिस्से का पानी मिला कर गर्म कर के उपयोग में लेना चाहिए | में आधा पानी मिलाकर पानी जल जाए तथा केवल दूध बाकी रह जाए इस प्रकार उबाला हुआ दूध अधिक  पथ्य गिना जाता है | 

दुहने के बाद, दो-तीन घंटे बीत जाने पर ठंडा पड़ा हुआ दूध त्रिदोष कारक होता है | दूध ताजा हो तो उसे गर्म करने की जरूरत नहीं होती अन्यथा दूध को ठीक से गर्म किए बिना उपयोग में ना ले | बासी या लंबे समय तक फ्रिज में रखा हुआ दूध पचने में भारी होता है और उसके गुणों का संपूर्ण लाभ नहीं मिलता, दूध में सूक्ष्म जंतु उत्पन्न हो जाते हैं इसलिए दूध को गर्म करके हिफाजत से रखें और उसका उपयोग करें |

अधिक जानकारी के लिए ” ”  विडियो देखे धन्यवाद 
https://www.youtube.com/watch?v=oJapniumdN0



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