मूली व मूली के पत्तों के फायदे – पाचन क्रिया से सम्बंधित बीमारिया,

मूर्ति अत्यंत प्रसिद्ध है और भारत में सभी जगह पर होती है | मूली का उपयोग प्राचीन काल से होता रहा है | मूली विशेषकर सदियों की ऋतु में होती है | कुछ स्थानों में यह सभी  ऋतुओं में उपलब्ध होती है | मूली कच्ची खाई जाती है | मूली के पत्तों का साग भी बनता है | सुकोमल मूली का आचार और रायता बनता है | 

वैज्ञानिकों के अनुसार मूली में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन होते हैं | इसमें विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘सी’, पोटेशियम और सूक्ष्म मात्रा में तांबा भी होता है |

जठराग्नि का मंद होना, खाने में अरुचि, पुरानी कब्ज, बवासीर, अफारा, पेशाब के रोग, किडनी और पित्त की थैली की पथरी, हिचकी, सूजन आदि रोगों में मूली लाभदायक है|

भोजन के मध्य में कच्ची मूली खाने से खाने में रूचि बढ़ती है | कोमल मूली का कचूमर भोजन के साथ खाने से जठराग्नि तेज होती है | मूली में ज्वर नाशक गुण होते हैं |

शीतकाल में मूली दीपन, पाचन और पोषण करने वाली है | मूली के पत्ते अधिक मात्रा में खाने से पेशाब और दस्त साफ आते हैं | बवासीर के रोगी को मूली के पत्ते तथा इसका रस देने से फायदा होता है | मूली की अपेक्षा उसके पत्तों के रस में ज्यादा गुण होते हैं |


मूली के पत्ते पाचन में हल्के रुचि उत्पन्न करने वाले और गरम होते हैं  | परंतु घी में इनकी बनाकर खाने से ये गुणकारी हो जाते हैं | 

मूली के पत्तों का रस मूत्रल,  सारक एवं पथरी और रक्त पित्त का नाश करता है | 

कोमल मूली में शक्कर मिलाकर खाने से अथवा इसके पत्तों के रस में शक्कर मिलाकर पीने से अम्लपित्त मिटता है |

मूली के रस में नींबू का रस मिलाकर पीने से भोजन के बाद पेट में होने वाला दर्द या गैस मिटती है | 

कोमल मूली के काढ़े में पीपल का चूर्ण मिलाकर पीने से अग्नि प्रदीप्त होता है एव अपचजन्य उल्टी या दस्त बंद होते हैं |

मूली के पत्तों का 25 से 50 ग्राम रस पिलाने से सूजन जल्दी उतर जाती है | 

मूली और मूली के पत्तों को सरसों के तेल में भूनकर भुर्जी बना लें | इसे खाने से जिगर और गुर्दे के सभी रोग ठीक हो जाते हैं | 

मूली के टुकडे और बराबर मात्रा में जिमीकंद के टुकड़े कांजी में डालकर 1 सप्ताह रखें | फिर इनको खाने से बवासीर ठीक हो जाती है | 

एक कप मूली के रस में एक चम्मच अदरक और नींबू का रस डालकर पीने से अरुचि भूख में कमी पेट फूलना कब्ज और पेट की बीमारियां ठीक हो जाती है | 

खाली पेट मूली खाने से छाती में दाह होता है और पित्त उत्तेजित होता है | शरद ऋतु में भी मूली का सेवन हितावह नहीं है |





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