मानव शरीर की रचना और इसकी सम्पूर्ण जानकारी ( Part 1): स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक भोजन, जल व वायु :-

प्रकृति की सारी रचना में शरीर की रचना एक बड़ा कठिन, जटिल किंतु बहुत सुंदर विषय है | यह एक बड़ी भारी मशीन है जिस को चलाने के लिए एक शक्ति इस में रहती है | इस मशीन को चलाने के लिए आवश्यक है संतुलित भोजन, जल और वायु |

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जो कुछ भी हम खाते हैं हम उसको भोजन कहते हैं एक साधारण भ्रम जो जनता में वर्षों से फैला हुआ है लोगों की शरीर को स्वस्थ व बलिष्ठ बनाने के लिए मूल्यवान भोजन की आवश्यकता होती है | इस विचार में कदापि भी सत्यता नहीं है | भोजन के ज्ञान से निर्धन से निर्धन मनुष्य उसको पोषक तथा बलवर्धक बना सकता है और भोजन को अज्ञानता से धनवान से धनवान मनुष्य विष के समान बना सकता है |सत्यता इस बात पर है कि उचित समय पर उचित मात्रा में उचित रुप में निश्चित होकर खाया हुआ भोजन सदा ही लाभदायक रहता है |

यदि निराहार बगैर भोजन के रहकर मनुष्य 20 दिन तक जीवित रह सकता है, तो निर्जल व निराहार रहकर केवल 5 दिन ही जीवित रह सकता है |
कुछ भी हो जल शरीर का एक अति आवश्यक अवयव है | पानी शरीर के भार का 66 पतिशत होता है | पानी के बिना जीवित रहना दुर्लभ है | सादा शीतल जल ही शरीर के लिए सदा लाभदायक होता है | बर्फ मिला पानी हानिकारक होता है | दिन भर में मनुष्य को लगभग 3 किलो पानी अवश्य इस मशीन रूपी शरीर में डालना चाहिए  | जिस की मात्रा सर्दी गर्मी में कम या ज्यादा की जा सकती है | 
निराहार निर्जल रहकर तो 5 दिन जीवित रहा जा सकता है किंतु वायु के बिना तो एक पल भी जीवित रहना दुर्लभ है | इसी कारण शरीर के लिए वायु अति आवश्यक है | जो मनुष्य बंद कोठरियों में और सकरी गलियों में रहते हैं वे सदैव किसी न किसी रोग से ग्रस्त र

हते हैं | प्रतिदिन 2-4 बार शुद्ध हवा में आकर 2-4 गहरी लंबी सांसे लेने से बहुत से रोगों के होने की संभावना समाप्त हो जाती है | यह वह वस्तु है जो इस शरीर रुपी मशीन के चलते रहने के लिए आवश्यक है  | जिनकी सहायता से यह चलती हुई मशीन महान से महान कार्य कर सकती है |

मानव शरीर की रचना और इसकी सम्पूर्ण जानकारी (Part 2)



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