पीपल का पेड़ के आयुर्वेदिक और स्वास्थ्यवर्धक फायदे

का पेड़ के आयुर्वेदिक और स्वास्थ्यवर्धक फायदे :-

एक धार्मिक महत्व का वृक्ष है इसकी पूजा अर्चना की जाती है एवं कामनाओं की पूर्ति के लिए याचना भी की जाती है |  मगर यह बहुत कम लोग जानते हैं कि के पौधे लोगों को स्वस्थ व रोग मुक्त रखने में सहायता करते हैं | के पेड़ में जड़ से लेकर पत्तों तक रोगों को दूर करने की अद्भुत क्षमता होती है | दूध जैसा सफेद दिखने वाला इसका रस हृदय रोग को दूर करता है |

आयुर्वेदिक ग्रंथों में भी के औषधीय गुणों का महत्व बतलाया गया है | इसके कुछ औषधीय उपयोग जो बहुत सहज, सरल और निरापद है उनका आगे वर्णन किया गया है |

1) हार्ट अटैक: 

के 15 पत्ते लें जो हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों । प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें । पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें । इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार ।
इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।

2) स्मरनशक्ती :- के पूरी तरह से पके हुए 5 फलों को प्रतिदिन खाने से स्मृति शक्ति बढ़ती है | साथ ही शरीर भी पुष्ट और ओजयुक्त हो जाता है |

3) गर्भधारण :- के सूखे फलों को कूट-पीसकर कपड़े से छान ले |जो स्त्री गर्भधारण नहीं करती हो उसे यह चूरन 5 ग्राम मात्रा में एक गिलास गुनगुने यानि हल्के गर्म दूध के साथ नियमित सेवन करने से गर्भधारण अवश्य होता है | केवल मासिक धर्म के दिनों में इसका सेवन नहीं करना चाहिए |
4) शीघ्रपतन :- पुरुषों में शीघ्रपतन की शिकायत अक्सर हुआ करती है | के दुधिया रस की 11 बूंदे चीनी के एक बताशे में टपकाकर प्रतिदिन सेवन करने से सारा दोष मिट जाता है | कुछ महीनों तक इसका सेवन जारी रखना चाहिए |

5) श्वास रोग :- सांस फूलने पर की सूखी छाल के चूर्ण की 5 ग्राम मात्रा गुनगुने जल के साथ दिन में तीन बार लेने से काफी राहत मिलती है और धीरे-धीरे यह रोग शांत हो जाता है |

6) कब्ज :- कभी-कभी मल आंत में ही सूखने लगता है जिसके कारण सख्त कब्ज हो जाती है | के पत्तों को छाया में सुखाकर उसके चूर्ण को गुड़ के साथ मिलाकर गोलियां बना ले | रात को सोने से कुछ समय पूर्व दो गोली गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से कब्ज में शीघ्र लाभ होता है |

7) आंखों से पानी गिरना :- आंखों से पानी गिरने पर की पांच कोपले एक कटोरी पानी में रात को डाल देनी चाहिए और सुबह इसी पानी से आंखों को धोना चाहिए | कोपलो के रस में शुद्ध मधु डालकर सिलाई से आंखों में प्रतिदिन लगाने पर आंखों की लाली तथा जलन में काफी आराम मिलता है |
दांत दर्द :- के छोटे पत्तों को काली मिर्च के साथ पीसकर मटर के आकार की गोलियां बना ले | एक गोली प्रत्येक सुबह दांतो के तले दबा कर कुछ देर रखने से दातों का दर्द समाप्त हो जाता है |

8) नकसीर :- ग्रीष्म ऋतु में लोगों को प्राय नकसीर हो जाती है | 50 ग्राम की गोंद में मिश्री की समान मात्रा मिलाकर चूर्ण बना लेनी चाहिए | प्रत्येक सुबह इस चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा का सेवन करने से शरीर की गर्मी शांत हो जाती है तथा नकसीर से छुटकारा मिल जाता है |
पीलिया रोग :- और लसूड़े के 11 पत्ते अच्छी तरह पीसकर, उसमें सेंधा नमक मिलाकर 15 दिनों तक पीने से पीलिया रोग नष्ट हो जाता है |

9) पेट के कीड़े :- के पंचांग का चूर्ण एवं गुड़ समान मात्रा में मिलाकर सौंफ के रस के साथ दिन में दो बार सेवन करने से पेट के सारे कीड़े मर जाते हैं | बच्चों के लिए यह बहुत उपयोगी है |



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