आयुर्वेद के अनुसार भारत की नदियों के :-

जल प्रकृति का उपहार है | चरक संहिता में तमाम नदियों की जल गुण चर्चा है। अथर्ववेद को आयुर्वेद का स्नोत कहा जाता है। अथर्ववेद में कहते हैं ‘जो जल रसों व प्राण से युक्त हो वह जल औषधि है।’

आयुर्वेद में वात, पित्त और कफ तीन दोष बताये गए हैं। पूर्वी भारत की सभी नदियां वात व कफ कारक होती है जबकि पश्चिमी भारत की सभी नदियां पित्त को बढ़ाने वाली और कफ व वात का नाश करने वाली होती है | आयुर्वेद में भारतवर्ष की बड़ी नदियों के स्वास्थ्यवर्धक गुण और दोषों का वर्णन किया गया है | वह जानकारी हम यहाँ देने जा रहे है |

गंगा :-

गंगाजल विपाक रस में मधुर, शीतल, त्रिदोष शामक होता है | यह अत्यंत पवित्र, पथ्य, हितकारी व मनोहारी होता है | यह बनाने के लिए अतीव उचित माना जाता है | गंगाजल दोषो का हरण करने वाला, प्यास की व्याकुलता व मोह यानि बेहोशी को नष्ट करने वाला होता है | यह शास्त्र ग्रहण करने वाले यानि विद्यार्थियों के लिए अत्यंत हितकारी तथा बुद्धि को बढ़ाने वाला होता है |

यमुना :-

यमुना जल पूर्वोक्त गंगाजल से कुछ भारी स्वादु व परम पित्त हर होता है | यह वातकारक, जठराग्निवर्धक एवं रुक्ष होता है |

नर्मदा :-

नर्मदा का जल अति स्वच्छ, प्रशस्त, शीतल मधु व लेखन होता है | यह पित्त व कफ का शमन करने वाला व सर्व रोग हर यानि सभी तरह के रोगो को हरने वाला माना जाता है |

गोदावरी :-

गोदावरी खुजली व कुष्ठ रोग का शमन करने वाला व जठराग्निवर्धक होता है |
यह पावन, पवित्र व वात और पित्त को हरने वाला माना जाता है | गोदावरी जल पित्त के रोग, रक्त पित्त व वात रोगों का निवारण करने वाला होता है | यह अतीव पथ्य, दीपन व पाप नाशक माना गया है | गोदावरी का जल कुष्ठ आदि दुष्ट रोगो का नाश करता है | वात, पित्त और कफ तीनों दोषों का नाश करता है तथा तृष्णा निवारक यानी प्यास बुझाने वाला होता है |

कृष्ण वेणी नामक :-

कृष्ण वेणी नामक रुक्ष, शीतल तथा रक्त प्रकोप कारक होता है | यह कुछ लघु, मधुर व स्वादु होता है |

कावेरी :-

कावेरी पथ्य, आम नाशक यानी ऑव को पचाने वाला, बल वृद्धि करने वाला, रंग निखारने वाला होता है | यह अग्नेय होता होते हुए भी शीत प्रभाव वाला होता है तथा दाद, कुष्ठ व विष का निवारण करता है |

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