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पपीता एक फल है। इसका छिलका बेहद मुलायम होता है जो आसानी से उतर जाता है | इसे काटने पर इसके भीतर कई छोटे-छोटे काले रंग के बीज होते हैं | स्वास्थ्य के दृष्टि से ये एक बहुत ही फायदेमंद फल है | कच्ची अवस्था में पपीता हरे रंग का होता है और पकने पर पीले रंग का हो जाता है। इसके कच्चे और पके फल दोनों ही उपयोग में आते हैं। कच्चे फलों की बनती है। इन कारणों से घर के पास लगाने के लिये पपीता बहुत उत्तम फल है। पपीते में कारपेन नामक क्षारीय द्रव्य है | उच्च रक्तचाप पर इसका अच्छा असर पड़ता है | आंत्रकृमि, लीवर व तिल्ली संबंधी विकार पपीता खाने से मिटते हैं | पपीता खाद्य फल होने के साथ-साथ औषधि भी है | पके हुए पपीते के टुकड़े करके उसमें थोड़ा सा नमक, काली मिर्च और नींबू का रस डालकर खाने से यह खूब स्वादिष्ट लगता है | पपीते और नींबू को मिलाकर खाने से शरीर को कई लाभ मिलता है। पके पपीते में थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ कर खाने से आम के समान विलक्षण स्वाद आता है | आम और पपीता दोनों में ही विटामिन ‘सी’ भरपूर मात्रा में पाया जाता है मगर आम और पपीते में फर्क यह है कि आम जैसे-जैसे पकता है विटामिन ‘सी’ उसमें से कम होता जाता है जबकि पपीता जैसे-जैसे पकता है विटामिन ‘सी’ की मात्रा बढ़ती जाती है, इन दोनों के फलों में यही अंतर है |

दोस्तों,
पेट के विकारों को दूर करने के लिए पपीते का सेवन सर्वोत्तम माना जाता है | पपीते में उच्च मात्रा में फाइबर मौजूद होता है | पपीते के सेवन से पाचन क्रिया में सुधार होता है, भूख लगती है और शरीर की कार्य शक्ति बढ़ती है | साथ ही पपीता अन्य आहार को पचाने में भी सहायक होता है |

दोस्तों,
पपीता एक स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक फल है | इसमें कई औषधीय गुण भी पाए जाते हैं | यह कई रोगों का एकमात्र उपचार है | पपीते में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘बी’, विटामिन ‘सी’ और विटामिन ‘D’ होते हैं | अन्य फलों की तुलना में पपीते में विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में होता है इसलिए आंखों, मुत्राशय, वक्क-गुर्दे से संबंधित रोगों से शरीर की रक्षा करता है |इसमें विटामिन ‘सी’ भी अधिक मात्रा में होने के कारण यह अस्थि रोग यानि हड्डियों के रोग, दांतों के रोग और हाई ब्लड प्रेशर, T.B., गठिया, वात, उल्टी आदि रोगों से बचाता है | पपीता उदर रोग यानी पेट के रोग जैसे कब्ज, एसीडीटी आदि और हृदय रोगों के लिए उत्तम औषधि है | पपीता उदर रोग व हृदय रोग के लिए उत्तम औषधि है | कब्जियत, आंतों की कमजोरी और हृदय के लिए तो पपीते से बढ़कर कोई औषधि ही नहीं है | कच्चे पपीते का साग बनाकर खाने से उदर रोग और हृदय रोग के रोगियों को खूब लाभ होता है | आंतों के कीड़े, लीवर, तिल्ली संबंधी विकार पपीता खाने से मिटते हैं | बढ़ते बच्चों को नियमित रुप से पपीता खिलाने से उनकी लंबाई बढ़ती है और शरीर मजबूत वह तंदुरुस्त बनता है | पपीते के पत्तों का प्रभाव ह्रदय पर डायलेसिस के समान होता है | पपीते के पत्तों के उपयोग से नाड़ी की गति कम होती है और हृदय की धड़कन नियमित होती है, दिल को आराम मिलता है, छूटता है और मूत्र की मात्रा बढ़ती है | हृदय को बल मिलता है और लीवर मजबूत होता है | पपीता पाचन तंत्र यानी डाइजेस्टिव सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाता है पपीता अन्य आहारों को पचाने में सहायक भी बनता है | पीरियड्स के दौरान इसका सेवन करने से पीरियड में होने वाले दर्द से आराम मिलता है | पेट के विकारों को दूर करने के लिए पपीते का सेवन सर्वोत्तम माना गया है | पपीते के सेवन से पाचन क्रिया में सुधार होता है, भूख लगती है और शरीर की कार्य शक्ति बढ़ती है |

कुछ ध्यान रखने योग्य बातें :-

  • पपीता गर्म होता है इसलिए अत्यधिक मात्रा में पपीते का सेवन करने से नुकसान हो सकता है |
  • गर्भवती महिलाओं को पपीता खाने से परहेज करना चाहिए | इससे गर्भपात का खतरा रहता है |
  • इसके अलावा जिन स्त्रियों को मासिक धर्म अधिक आता हो, उन्हें भी पपीता नहीं खाना चाहिए |
  • प्रमेह के रोगियों को भी पपीते का सेवन संभलकर करना चाहिए |

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