|| || ियत किन कारणों से होती है ?

जिसे इंग्लिश में भी कहते है, सब रोगों का मूल है | दूसरे शब्दों में यह भी कहा जा सकता है की ही सभी बिमारिओ की जड़ है, इसलिए पेट को हमेशा साफ रखना चाहिए | पेट में शुष्क मल का जमा होना ही है। यदि का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। ियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। रोज कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता या के रोग की निशानी है।

 

लेकिन किन कारणों से होती है ? या के क्या कारण हैं?

 

अलग अलग व्यक्तिओ में के अलग-२ कारण हो सकते है | साथ ही के अलग अलग लोगों के लिए अलग अलग मायने हो सकते है । कुछ लोगों के लिए यह असमय मल त्यागना हो सकता है, और कुछ लोगों के लिए केवल कठिन मल का त्यागना हो सकता है । जो भी मामला हो, इस समस्या का मूल कारण हमारी गलत जीवनशैली है । इसके साथ-२ :-

 

पर्याप्त पानी न पीना :-

पर्याप्त पानी न पीना या पानी का कम सेवन क्योंकि पानी से शरीर के सभी टॉक्सिन्स निकालने के लिए पानी महतवपूर्ण भूमिका निभाता है । पर्याप्त पानी न पीने के कारण मल कठिन हो जाता है |

 

भोजन में फाइबर की कमी :-

आहार में ताज़े फल और हरी पत्तेदार सब्जियों की कमी से, विशेष रूप से वह भोजन जिसमें फाइबर कम हो, जैसे पनीर, मांस और अंडे । इनके अधिक सेवन से कब्ज़ हो सकती है ।

 

मल रोकने की आदत :-

निश्चित समय अंतराल पर बाथरूम का उपयोग नहीं करते और अपने मल को रोक कर रखते है उनका मल आंतो में जा कर इकठ्ठा होने लग जाता है | जो की का कारण बनता है |

 

शारीरिक परिश्रम कम करना :-

शारीरिक परिश्रम कम करने या ना करने जैसे कम चलना या कम काम करना, किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना, आलस्य करना, शारीरिक श्रम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करने से हमारे शरीर के अंग सुस्त पड़ने लगते है और आंतों की गतिविधि कम हो जाती है जिससे की की समस्या हो सकती है ।

 

अस्वस्थ भोजन :-

अनियमित समय पर भोजन करने, भोजन खूब चबा-चबाकर न करना अर्थात् जबरदस्ती भोजन ठूँसना, जल्दबाजी में भोजन करना, बगैर भूख के भोजन करना, अधिक देर तक खाली पेट रहने और अस्वस्थ भोजन जिसमे मैदे से बनी वस्तुए, तली हुई चीजे, तेज मिर्च मसाले आदि शामिल है, करने से हो सकती है ।

बीमारियां :-

मधुमेह, कोलन कैंसर, रोलॉजिकल विकार जैसे पर्किंसन और हाइपोथॉइरायडिज्म और अन्य बीमारियां जिनके कारण पाचन तंत्र की तंत्रिकाओं एवं मांसपेशियों में कोई परेशानी होने पर वह सुस्त पड़ जाती है और हो सकती है ।

 

दवाएं :-

पैदा करने के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार दवाएं होती हैं । कुछ विशेष दवाओं जैसे नशीली दवाओं (narcotics), दर्द निवारक एवं आयरन की गोलियां खाने से भी हो सकती है ।

 

गर्भावस्था :-

गर्भावस्था में शरीर में कुछ ऐसे हार्मोनल परिवर्तन होते है जो एक महिला में होने की सम्भावना को बढ़ा देते है । इसके अलावा गर्भाशय आंत को संकुचित कर सकता है जिसके कारण भोजन के मार्ग में गति धीमी हो जाती है जो कब्ज़ करती है ।

 

 

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