से रोगों का उपचार:-

भारतीय भोजन का एक महत्वपूर्ण अंग है जो की पुराने समय से स्वास्थ्यसंबंधी विकारो को दूर करने के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है | एक प्राकृतिक औषधि है । वमन यानि उलटी, पाचन सम्बन्धी विकारो को दूर करने और शरीर में होने वाले अनेक रोगों को दूर करने की एक चमत्कारी औषधि है |
में इतने गुण भरे हुए हैं कि अकेला ही अनेकों रोगों का उपचार कर सकता है इसलिए को महाऔषधि भी कहते है |

ताजा, पीस कर, पाउडर के रूप में या फिर इसका रस निकाल कर और सूखा, अलग-अलग प्रकार से प्रयोग में लाया जाता है | इसमें आयरन, कैल्शियम, आयोडीन, क्लोरीन, विटामिन सहित कई पोषक तत्व मौजूद होते हैं |
भोजन से पहले की कतरन पर नमक डाल कर और आधा निम्बू का रस डालकर खाने से भूख खुलती है, खाने में रूचि उत्पन्न होती है, आहार का पाचन होता है, कफ और वायु के रोग नहीं होते और कंठ यानि गले और जीभ की शुध्दि होती है |
आइये दोस्तों आपको के कुछ लाभों के बारे में जानकारी देते है :-

    1. पेट के रोगो में लाभकारी

    1. गला बैठने पर के लाभ और उपचार

    1. खांसी होने पर के फायदे और उपचार

    1. दमा रोग में के लाभ और उपचार

    1. करने के लिए है लाजवाब

  1. के उपयोग से पूर्व यह जान ले की कब नुकसान करती है?

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पेट के रोगो में लाभकारी :-

पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है | आजकल गलत जीवनशैली के कारण ज्यादातर सभी लोगो को पेट की गैस का रोग परेशान किए हुए रहता है । गैस के रोग में का सेवन तो रामबाण औषधि की तरह कार्य करता है । यह पेट की गैस के अलावा , भूख भी बढ़ाता है और कब्ज जैसी खतरनाक बीमारी को भी दूर करता है ।
10 ग्राम कच्ची को छुरी से छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े बना लें और उसमें थोड़ा – सा नींबू का रस व काला नमक डालकर दोनों समय के भोजन के साथ खाने से पाचन क्रिया ठीक रहती है | इससे पेट में गैस भी नहीं बनती, खट्टी डकारे आने बंद हो जाती है तथा कब्ज की समस्या भी दूर होती है | दूसरी विधि के अनुसार सबसे पहले को सुखाकर बना लें , क्योंकि सूखी हुई को कहते है । , हींग और काला नमक को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें । फिर रोजाना एक – एक चम्मच सुबह और शाम एक हफ्ते तक ताजे पानी के साथ इस मिश्रण का सेवन करें । पेट का हर रोग आपसे दूर भागेगा ।

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गला बैठने पर के लाभ और उपचार :-

कभी – कभी इंसान का गला इतना खराब हो जाता है की उसकी आवाज भी नहीं निकल पाती । ऐसी स्थिति कभी-कभी चिन्ताजनक हो जाती है । ऐसे रोगी के उपचार में अत्यन्त फायदेमंद सिद्ध होता है । ऐसे रोगी को का रस और शहद मिलाकर दिन में तीन – चार बार चाटने से कुछ ही दिनों में बन्द गला खुल जाता है ।

दूसरी विधि के अनुसार और हींग दोनों को गर्म तवे पर रखकर भून लें | फिर दोनों को पीसकर उसमे काला नमक मिलाकर उसकी मटर के आकार की गोलियां बना लें । फिर हर रोज तीन – चार बार उन गोलियां को चूसें , ध्यान रहे उन गोलीओ को चबाना या निगलना नहीं है सिर्फ चूसना है, तीन दिन में ही गला खुल जाएगा ।

खांसी होने पर के फायदे और उपचार:-

एक बार खांसी का रोग लग जाये तो व्यक्ति ही नहीं उसके आस पास वाले भी परेशान हो जाते है । खास तौर पर बच्चों को खांसी होने पर बच्चे ही नहीं उन्हें देख कर बड़े भी परेशान हो जाते है | खांसी की बेहतरीन दवा है | के छोटे-छोटे टुकड़े कर के बराबर मात्रा में शहद के साथ हल्का गर्म यानि गुनगुना गर्म करके दिन में दो बार खाने से खांसी आनी बंद हो जाएगी और गले की खराश भी दूर हो जाती है |

दमा रोग में अदरक के लाभ और उपचार :-

दमे के रोग के उपचार के लिए 25 ग्राम अदरक को कूटकर 250 ML पानी में डालकर उबालें । जब पानी उबल-2 कर आधा रह जाए तो उसमें तक़रीबन 200 ML दूध तथा स्वादानुसार चीनी मिलाकर चाय की तरह बनाकर छान लें । दिन में तीन से चार बार उस चाय का सेवन करने से 60 दिन में ही दमे के रोग से छुटकारा मिल जाता है | इस तरीके से बनी हुई चाय के एक हफ्ते के प्रयोग से ही खांसी , नज़ला और जुकाम जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं ।
दूसरी विधि के अनुसार 10 ग्राम और 20 ग्राम गुड़ को 200 ML पानी में डालकर उबालें । पानी जब तक़रीबन 100 ML रह जाए तो उसे नीचे उतार कर ठण्डा कर लें । इस तरीके से बनी हुई चाय का तीन दिन तक दिन में तीन बार सुबह, शाम और रात को रोगी को पिलाये । इस उपचार से खांसी, नज़ला और बुखार तक दूर हो जाता है ।

करने के लिए अदरक है लाजवाब :-

करने के लिए अदरक की एक गांठ को पीसकर या छोटे-2 टुकड़ों में काट कर, अदरक के उन टुकड़ो पर नमक व काली मिर्च छिड़क कर ऊपर से आधे नींबू का रस निचोड़ कर खाने से कुछ ही दिनों में हो जाएगा | साथ ही अदरक खाने से कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण में रहता है खून का दौरा सही रहता है और खून के थक्के नहीं बनते |

अदरक के उपयोग से पूर्व यह जान ले की अदरक कब नुकसान करती है:-

    1. अदरक इतना गुणकारी होने पर भी इसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से करना चाहिए | ग्रीषम ऋतू और शरद ऋतू में अदरक का सेवन करना हितावह नहीं मन जाता इसलिए इन् ऋतुओ में इसका सेवन नहीं करना चाहिए |
    1. जो लोग कुष्ठ रोग, पाण्डु रोग यानि पीलिये के रोग से ग्रसित हो उन्हें भी इसका उपयोग नहीं करना चहिये |
  1. जो लोग रक्तपित्त, ज्वर, सुखी खांसी अम्लपित्त यानि एसिडिटी के रोग से पीड़ित हो अदरक उनके लिए निषेद्य है | उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए |

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1 Comment

  • जानकारी के लीये धन्यवाद सुखी खासी मे केसे इतमाल करेे अद्रक ?

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