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डायबिटीज का होता है इन अंगों पर असर, जानें कैसे करें इलाज और बचाव || 8 IMPORTANT COMPLICATIONS OF DIABETES

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डायबिटीज का होता है इन अंगों पर असर, जानें कैसे करें इलाज और बचाव

 

डायबिटीज क्या है?

हाई ब्लड शुगर लेवल को हम डायबिटीज यानी मधुमेह के नाम से जानते हैं | मधुमेह एक ऐसी बीमारी है जिसमें शरीर इंसुलिन का सामान्य रूप से पर्याप्त या प्रतिक्रिया का उत्पादन नहीं करता है, जिससे ब्लड में शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है।

अगर डायबिटीज को सही समय पर कंट्रोल न किया जाये, तो इससे त्वचा और आंखों से जुड़ी आम समस्याओ से लेकर ब्रेन स्ट्रोक और नर्वस सिस्टम से जुड़ी गंभीर समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है |

दोस्तों, यहां हम आपको डायबिटीज़ की वजह से शरीर में कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं और इनके इलाज और बचाव के लिए क्या किया जा सकता है, के बारे में जानकारी देने जा रहे है |

डायबिटीज क्या है || इन्सुलिन क्या है

लेकिन उससे पहले यह जानना आवश्यक है की डायबिटीज किस तरह शरीर पर असर डालता है?

इस सवाल का जवाब पाने से पहले आपको यह जानना आवश्यक है की डायबिटीज है क्या और इन्सुलिन और इन्सुलिन रेजिस्टेंस क्या है ?

आइये दोस्तों शुरुआत से समझते है, सबसे पहले 

इन्सुलिन क्या है ?

इन्सुलिन हमारे भोजन को पचाने वाला एक हार्मोन है जिसे हमारा अग्न्याशय (Pancreas) जरूरत की हिसाब से उत्पादन (Produce) करता है | शरीर में इन्सुलिन का कितना उत्पादन करना है यह blood में Glucose के स्तर के आधार पर यह निर्धारित किया जाता है |

Insulin || इंसुलिन क्या है? || शुगर कैसे होती है? || Insulin in hindi

इन्सुलिन प्रतिरोध यानि इन्सुलिन रेजिस्टेंस क्या है ?

इंसुलिन रेजिस्टेंस तब होता है जब हमारे शरीर की मांसपेशियों और Liver की कोशिकाएं इंसुलिन नामक हार्मोन के द्वारा भेजे गए उस संकेत का प्रतिरोध करती है या अनदेखी करती हैं जिसके अनुसार उन्हें Glucose को blood से बाहर निकालकर शरीर की कोशिकाओं के द्वारा इस्तेमाल किया जाये |
शरीर में जैसे ही इंसुलिन प्रतिरोध विकसित होना शुरू होता है, हमारा शरीर उस प्रतिरोध को समाप्त करने के लिए अधिक इंसुलिन का उत्पादन करके वापस लड़ता है ।
जैसे-२ इन्सुलिन प्रतिरोध बढ़ता जाता है अग्नाशय पर इन्सुलिन का उत्पादन (Production) करने का दबाव बढ़ता जाता है और जब अग्नाशय जरूरत के हिसाब से इन्सुलिन का उत्पादन नहीं कर पाता तो हम डायबिटीज के शिकार हो जाते है |

टाइप-2 मधुमेह का सबसे बड़ा कारण :- इन्सुलिन प्रतिरोध की सम्पूर्ण जानकारी

डायबिटीज का असर शरीर के किन हिस्सों पर पड़ता है?


दरअसल, डायबिटीज एक तरह से चयापचय (मेटाबॉलिक) में ख़राबी की अवस्था है यानि मधुमेह एक विकार यानि Disorder है | शरीर में इन्सुलिन प्रतिरोध के कारण ब्लड में ग्लूकोस बढ़ जाने से दूसरी चीज़ों पर असर पड़ता है जो आखिरकार शरीर को अलग-अलग तरीकों से नुकसान पहुँचता हैं | ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करके इन नुकसानों से बचा जा सकता है या इन्हें ज़्यादा से ज़्यादा समय तक दूर रखा जा सकता है |

आगे पढ़ें और जानें कि डायबिटीज की वजह से शरीर को कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं और इनके इलाज और बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?

डायबिटीज का असर शरीर के किन हिस्सों पर पड़ता है?

आंख पर डायबिटीज का प्रभाव 

खून में ग्लूकोस लेवल अधिक बढ़ने पर शुरुआत में नज़रें धुंधली हो सकती है और अगर इस पर ध्यान न दिया जाए मोतियाबिंद होने का खतरा बढ़ जाता हैं |


इस गंभीर स्थिति को डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic retinopathy) कहते हैं | इसमें आंखों के रेटिना धीरे-2 ख़राब होने लगते हैं और कुछ गंभीर मामलों में तो आंखों की रोशनी पूरी तरह भी जा सकती है | टाइप 2 डायबिटीज़ से प्रभावित 20% से 40% लोगों में डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic retinopathy) की शिकायत होती है |

इलाज और बचाव:

शुगर के मरीजों को नियमित रूप से अपनी आंखों की जांच करवाते रहना चाहिए | ज़्यादातर समस्याओं का पता एकदम शुरूआत में ही लगने पर इसका इलाज फ़ोटोकोएगुलेशन (Photocoagulation) या सर्ज़री से किया जा सकता है |
डायबिटीज में आंखों से जुड़ी समस्याओ से बचने के लिए शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना ज़रूरी है |

आंखों के लिए आहार || आँखों के लिए क्या खायें || आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए क्या खाएं


त्वचा पर डायबिटीज का प्रभाव 

डायबिटीज आपके शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित कर सकती है, जिसमें आपकी त्वचा भी शामिल है। डायबिटीज़ से प्रभावित 30% लोगों में त्वचा संक्रमण (Skin Infection) होता है जिसमें शुष्क त्वचा, स्किन टैग्स (त्वचा में उभार) और आपकी त्वचा पर पीले, लाल, या भूरे रंग के पैच शामिल हैं |

मधुमेह
जब डायबिटीज त्वचा को प्रभावित करता है, तो यह अक्सर संकेत होता है कि आपके रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) का स्तर बहुत अधिक है। इसका मतलब यह हो सकता है कि आपको तुरंत अपनी शुगर को कंट्रोल करने की आवश्यकता है |

इलाज और बचाव


दोस्तों, जब आप डायबिटीज के स्किन पर होने वाले प्रभावों के बारे में जान चुके है तो आइये अब आपको बताते है की आप उनका इलाज और बचाव कैसे कर सकते है।

अपनी स्किन पर होने वाले बदलावों पर हम नहाते समय आसानी से ध्यान दे सकते है और जैसे ही त्वचा पर कोई संक्रमण नजर आये तो तुरंत ही इसके इलाज के लिए डॉक्टर से मिलें |

अगर आपको लम्बे समय से डायबिटीज है तो इसका असर आपके हाथ-पैरो की सवेंदनशीलता पर भी पड़ सकता है। ऐसा होने पर इसे अनदेखा न करें और जांच ज़रूर कराएं |

इससे बचाव का सबसे बढ़िया उपाय यही है की आप अपने ब्लड शुगर पर ध्यान दे और इसे कंट्रोल में रखे | इसके साथ-२ सफ़ाई बरतने से त्वचा संक्रमण (Skin Infection) से लंबे समय तक बचा जा सकता है |

 

डायबिटीज और किडनी संबंधी रोग

किडनी से जुड़ी बीमारियों के पीछे डायबिटीज़ मुख्य कारण है | डायबिटीज किडनी के अंदर मौजूद ब्लड वाहिकाओं (vessels) को नुकसान पहुंचाकर किडनी को बीमार कर देती है | टाइप 1 डायबिटीज वाले लगभग सभी रोगियों को दो से पांच साल के भीतर किडनी से जुड़ी बीमारिया (Develop) विकसित होने लगती है। टाइप 2 डायबिटीज़ वाले लगभग 7% लोगों में डायबिटीज़ की पहचान होने से पहले ही किडनी की बीमारी के शुरुआत का पता चल जाता है |

इलाज और बचाव


किडनी पर डायबिटीज का कितना असर हुआ है यह जानने के लिए नियमित जांच करवाते रहना चाहिए ताकि शुरुआत में ही इसकी पहचान हो सके |
यदि आप मधुमेह से पीड़ित हैं, तो गुर्दे की विफलता को रोकने के तरीके:

  • अपने शुगर लेवल को कंट्रोल में रखे
  • अपने Blood Pressure को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाएं
  • Diabetes Diet Plan का सख्ती से पालन करे
  • धूम्रपान बंद करो
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • अपनी दवाएं नियमित रूप से लें

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ह्रदय और खून की नसें


ख़ून में हाई ब्लड शुगर लेवल (हाइपरग्लाइसीमिया) के साथ ही, डायबिटीज के मरीजों में हाई कोलेस्ट्रॉल और/या हाई ब्लड प्रेशर होने की संभावना होती है | ऐसे में ख़ून की नसें (Blood Vessels) सख्त़ हो सकती हैं, जिससे हार्ट अटैक (दिल का दौरा) या दिल से जुड़ी दूसरी तकलीफ़ें या स्ट्रोक हो सकता है | एक स्वस्थ व्यक्ति के मुक़ाबले डायबिटीज़ वाले लोगों में स्ट्रोक का ख़तरा ज़्यादा होता है | पैरों और नर्व्स में खून का फ़्लो कम होने से नर्वस सिस्टम (Nervous System) पर असर पड़ता है |

इलाज और बचाव:

आप कई तरीकों से ह्रदय से जुड़ी परेशानियों और स्ट्रोक के ख़तरे को कम कर सकते हैं, जैसे

  • अच्छी तरह ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करके,
  • धूम्रपान से बचकर,
  • शराब पीने में ज़्यादा से ज़्यादा कमी लाकर,
  • सेहतमंद खान-पान से,
  • एक्सरसाइज़ और
  • ब्लड प्रेशर लेवल को अच्छी तरह मैनेज करके.

पैरो और टांगो का दे खास ख्याल

दोस्तों क्या आप जानते है की हमारे देश में डायबिटीज से पीड़ित लाखो व्यक्तियों को हर साल अपने पैर खोने पड़ते हैं इसलिए मधुमेह के मरीजों को अपने पैरों का ख्याल रखना चाहिए चाहिए क्योंकि जैसे-जैसे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ता है वैसे-वैसे ही पैरों की नसों पर इसका असर भी बढ़ता जाता है।

दोस्तों, पैरों के बिना मधुमेह का इलाज असंभव है क्योंकि शुगर पर कंट्रोल करने के लिए विशेषज्ञ सुबह की सैर और टहलने को बहुत जरूरी मानते है | दूसरी भाषा में आप यह भी कह सकते है की मधुमेह का इलाज पैरों से शुरू होता है और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव भी पैरो पर ही पड़ता है |

इलाज और बचाव

अपने पैरों की नियमित जांच करें। पैरों में पड़े कट्स, क्रेक और नाखूनों को अच्छे से जांचे । पैरों की अंगुलियों के बीच और तलवों की जाँच अवश्य करे । अगर संभव हो तो किसी अन्य से भी अपने पैरों की जांच करवाएं।
शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए नियमित टहलें और व्यायाम करें।

पैरो का खास ध्यान रखे की उन पर कोई चोट न आये

यह 7 लक्षण बताते है की पैरों पर मधुमेह (डायबिटीज, शुगर) का प्रभाव होना शुरू हो गया है 

 

डायबिटीज पहुंचाती है नसों को नुकसान( नसों संबंधी रोग )

डायबिटीज के कारण शरीर की नसें भी प्रभावित (Damage) हो सकती हैं और इन नसों के डैमेज होने से आपके शरीर को बहुत सी परेशानियों को झेलना पड़ सकता है | जैसे 

शरीर में झुनझुनी होना 
शरीर के किसी हिस्से का सुन्न होना
जलन की अनुभूति

कब्ज और दस्त

इलाज और बचाव

अच्छी तरह ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करे |

 

डायबिटीज और मसूड़ों की बीमारी

अगर ब्लड शुगर को सही से नियंत्रित न किया जाए, तो आपके मसूड़ों की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। मसूड़ों की नसों को नुकसान के कारण मसूड़ों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी आ जाती है और मसूड़ों और हड्डियों की कमजोरी का कारण बनता है और कमजोर मसूड़ों पर बैक्टीरिया अटैक करते है और मसूड़ों को आसानी से नुकसान पहुंचाते है | 

इलाज और बचाव

ऐसे में नियमित ओरल चेकअप करने से जल्दी समस्या का पता चल सकता है। खासतौर पर ऐसे लोग जिन्हे पहले से डायबिटीज है। अगर आपके दांतों में खून आने या मसूड़ों में समस्या जैसे समस्याएं हैं तो आपको डॉक्टर से जांच कराने की सलाह दी जाती है।

 

डायबिटीज और कैंसर

जब आपको डायबिटीज होता है, तो आपको कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि डायबिटीज ( मधुमेह ) कुछ प्रकार के कैंसर के विकसित होने की सम्भावनाओ को बढ़ा सकता है।

मधुमेह और कैंसर के बीच की कड़ी को पूरी तरह से परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन एक सिद्धांत जो मौजूद है वह यह है कि जिन लोगों को टाइप 2 मधुमेह है, उनमें इंसुलिन प्रतिरोध होता है जो शरीर में सामान्य से अधिक इंसुलिन का उत्पादन करने का कारण बनता है। शरीर में जरूरत से ज्यादा इंसुलिन का उत्पादन ट्यूमर के विकास को बढ़ावा दे सकता हैजो कैंसर का कारण बनते है |

इलाज और बचाव

अच्छी तरह ब्लड शुगर लेवल को मैनेज करे |

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