Health Benefits of Bitter Melon

|| || इन रोगो में है परम पथ्य :-

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( mean ) स्वाद में कडुवा मगर गुण में परम हितकारी है | अत्यंत प्राचीन काल से साग-सब्जी के रूप में इसका इस्तेमाल होता रहा है | सब्जी होने के बावजूद ( mean ) कई रोगो की परम औषधि भी है इसीलिए करेले के मौसम में यथासंभव अधिक से अधिक करेले का सेवन करने की सलाह दी जाती है |

|| || करेले के फायदे ||  करेले के लाभ

करेले दो किस्म के होते हैं बड़े करेले और छोटे करेले | बड़े करेले की अपेक्षा छोटे करेले ज्यादा कड़वे होते हैं | करेले ( mean ) की सब्जी बनाते समय सभी लोग एक भारी गलती करते है और वह यह की सब्जी बनाते समय करेले को छीलकर उनकी छाल निकाल दी जाती है और करेले ( mean ) की कड़वाहट को कम करने के लिए उन्हें काटकर नमक में मसल का निचोड़ कर उनका रस निकाल दिया जाता है परंतु इससे करेले के गुण कम हो जाते हैं | जबकि करेले के साथ प्याज मिलाकर उनकी साग-सब्जी बनाने से करेले ( mean ) की कड़वाहट कम हो जाती है और सब्जी भी स्वादिष्ट बनती है |

|| || करेले के फायदे ||  करेले के लाभ

( mean ) शीतल, मल को तोड़ने वाला, हल्का और वायु ना करने वाला होता है | ( mean ) वात, पित्त, रक्त विकार, पांडू यानी पीलिया रोग में तथा कृमि यानि पेट के कीड़े को मिटाने वाला होता है | करेले (Karela mean ) में विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में, विटामिन ‘सी’ अल्प मात्रा में एव लोह और फास्फोरस मौजूद होते हैं | फास्फोरस अस्थियो, दाँत, मस्तक और शरीर के अन्य अवयवों के लिए अत्यंत उपयोगी है |
प्राकृतिक चिकित्सक करेले (Karela mean ) को रक्तशोधक, यकृत, प्लीहा रोग में लाभदायक, बहुमूत्र करने वाले, पांडू यानी पीलिया और कब्ज जैसे रोग को दूर करने वाले, पेट में कृमि को नष्ट करने वाले, पौष्टिक और गर्म असर उत्पन्न करने वाले, चेचक व खसरे से बचाने वाला मानते हैं |
बुखार और सूजन में करेले (Karela mean ) की साग-सब्जी पथ्य मानी जाती है | करेले (Karela mean ) की साग-सब्जी आमवात, रक्त, यकृत, प्लीहा वृद्धि और जीर्ण त्वचा रोग में भी हितकारी है |

मधुमेह यानि डायबिटीज (Diabetes) में लाभ पहुंचाने वाले करेले और जामुन के कुछ घरेलू नुस्खे

यानि डायबिटीज के रोगियों के लिए (Karela mean ) हितकारी है | प्रतिदिन सुबह करेले का रस लेने से इस रोग में निश्चित लाभ होता है | कड़वाहट निकाले बिना बनाई गई (Karela mean ) की साग-सब्जी भी यानि डायबटीज़ में भी हितकारी है | आहार की दृष्टि से भी करेले की साग-सब्जी यानि डायबटीज़ में परम पथ्य मानी जाती है |

बवासीर होने की दशा में एक चम्मच करेले के रस में शक्कर मिलाकर लगातार एक महीने तक पीने पर बहुत राहत मिलती है |

गठिया की बीमारी में भी आपके लिए बहुत लाभप्रद होता है क्योंकि गठिया में होने वाली सूजन या हाथ पैरो में जलन होने पर करेले () के रस से मालिश करने पर बहुत फायदा होता है |

दमा / अस्थमा होने की दशा में बिना मसाले की करेले की सब्जी खाने पर दमा में बहुत राहत मिलती है |

उलटी दस्त और हैजे जैसी शिकायत होने पर भी करेले (bitter gourd) का पूरा फायदा उठा सकते है | ऐसे में करेले (bitter gourd) के रस में थोडा काला नमक और पानी मिलाकर पीने से बहुत फायदा होता है |

करेले (bitter gourd) रक्त ही साफ़ नहीं करता यह हिमोग्लोबीन के लेवल को भी बढाता है क्योकि इसमें लोह भी काफी मात्रा में होता है जो यकृत और खून के लिए विशेष उपयोगी होता है इसलिए खाना हर मामले में फायदे का ही सौदा है |

करेले (bitter gourd) के मौसम में रोजाना इसके रस में सुबह-सुबह खाली पेट निम्बू मिलाकर छः महीने तक लगातार पीने से एक नये ही तरह की कांति चेहरे पर आ जाती है |

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