शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए ? | Sugar Me Kon Si Daal Khani Chahiye?

मधुमेह यानि शुगर के साथ जीना एक चुनौती है, लेकिन साथ ही अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देने का यह एक अच्छा मौका भी है। अपनी खाने की आदतों, खाद्य पदार्थों और भोजन की मात्रा में बदलाव लाने भर से आपके स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण लाभ दिखाई देने शुरू हो जाते है। दाल हमारे भोजन का एक अभिन्न अंग है जिसे आप अपने भोजन में कई तरीको से शामिल कर सकते है और उनके पोषक तत्वों के लाभ उठा सकते हैं। लेकिन क्या दाल मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद होती हैं? और शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए (Sugar Me Kon Si Daal Khani Chahiye)?

दाल कई प्रकार की होती है और उनमे से कई दाले मधुमेह के रोगियों के लिए फायदेमंद होती हैं, जैसे – राजमा, हरी बीन्स, काली बीन्स, लीमा बीन्स, छोले, अरहर की दाल आदि। दाले प्रोटीन और फाइबर के स्वस्थ और महत्वपूर्ण स्रोत हैं और साथ ही कई अन्य प्रकार के लाभ भी प्रदान करती हैं।

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शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए ? | Sugar Me Kon Si Daal Khani Chahiye?

मधुमेह के रोगियों के लिए दाले और फलियां सबसे शक्तिशाली सुपर-फूड्स में से एक हैं। वे पोषक तत्वों का एक पावरहाउस हैं और शरीर को स्वस्थ रखने और ब्लड शुगर पर नियंत्रण में रखने में सहायक होते है।

शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए

दाले मधुमेह के मरीजों के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि उनमें कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होने के बावजूद उनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स का स्तर काफी कम होता हैं। इसका मतलब यह है कि दालो से प्राप्त शर्करा, शरीर को ऊर्जा पैदा करने में मदद कर सकती है, लेकिन साथ ही इसका ब्लड शुगर पर अधिक प्रभाव भी नहीं पड़ता।

कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स की होने के कारण, दाले आपके पूरे भोजन के ग्लाइसेमिक इंडेक्स को संतुलित कर सकती हैं। यह आपके भोजन को मधुमेह जैसे रोग के लिए पौष्टिक और फायदेमंद बनती है।

दालो को बहुत ही फायदेमंद खाद्य पदार्थ माना जाता है क्योंकि वे प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होती है। ये दोनों उन महत्वपूर्ण सूक्ष्म पोषक तत्वों में से हैं जिनकी हमारे शरीर को प्रतिदिन आवश्यकता होती है।

दाले स्वास्थ्य के लिए पौधे से मिलने वाले प्रोटीन का एक अच्छा स्रोत हैं। पशु प्रोटीन के विपरीत, दाल में फैट कम होती है और इस प्रकार शरीर पर अन्य प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ते । दालो में संतृप्त (Saturated) फैट बिलकुल भी नहीं पाई जाती और इसी कारण यह मांसाहारी भोजन के मुकाबले प्रोटीन प्राप्त करने का एक स्वस्थ और बेहतरीन स्रोत्र है।

दाल गैर-स्टार्च वाली होती हैं और स्टार्च वाली सब्जियों की तुलना में अधिक पौष्टिक होती हैं। दालो में पाए जाने वाले फाइबर की मात्रा भी शरीर के लिए काफी मददगार हो सकती है।

भोजन में मौजूद फाइबर पाचन को संतुलित करने और शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को धीमा करने में आवश्यक भूमिका निभाता है। यह सुनिश्चित करता है कि कार्बोहाइड्रेट कुशलतापूर्वक इस्तेमाल कर लिया जाये और ब्लड शुगर पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव भी न पड़े।

Sugar Me Kon Si Daal Khani Chahiye

चयापचय में इस तरह के सुधार करके दाले आंत स्वास्थ्य को बेहतर करने में सहायक होती है। ये लाभ शरीर में इंसुलिन के प्रतिरोध को कम करने में भी सहायता करते हैं जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है।

क्या दाले ब्लड शुगर बढ़ाती हैं?

  • हम पहले ही चर्चा कर चुके हैं कि दाले मधुमेह के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छी हैं और ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर कम हैं। इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि दाले रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में सहायक होती है और किसी भी प्रकार से ब्लड शुगर के स्पाइक का कारण नहीं बनती।
  • दाले आपके रक्त शर्करा के स्तर को नहीं बढ़ाती क्योंकि वे एक प्रकार के जटिल कार्बोहाइड्रेट भोजन हैं। जटिल कार्बोहाइड्रेट को तोड़ना तुलनात्मक रूप से अधिक कठिन होता है और इसके लिए अधिक समय लगता है। यह सुनिश्चित करता है कि ब्लड शुगर का स्तर अचानक न बढ़े और स्थिर रहे।
  • इस प्रकार, दाल का सेवन करने से मधुमेह के रोगी को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं होता बल्कि दाले अनेको पोषक तत्वों और खनिजों से भरपूर होती है जो मधुमेह के रोगी के लिए फायदेमंद होते है।
  • मधुमेह के रोगी को गंभीर बीमारिया होने का अधिक खतरा होता है और वे तेजी से गंभीर बिमारिओ की चपेट में आ सकते है और गंभीर लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। दालो में मौजूद कई प्रकार के खनिज और प्रोटीन शरीर की सम्पूर्ण शक्ति में सुधार करने में सहायता करते हैं। जो शरीर को अन्य स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओ से बचने में सहायक होते है।
  • किसी भी मधुमेह रोगी के लिए प्रति भोजन में आधा कप दालो का सेवन करना फायदेमंद रहता है। यह मधुमेह के रोगी के लिए कार्ब्स के निम्न स्तर (15 ग्राम) और पर्याप्त कैलोरी (125) की सुरक्षित मात्रा है जो भूख को पूरा करती है।
  • दालो में मौजूद फाइबर भोजन में अन्य वस्तुओं से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट के प्रभाव को कम करने में भी मदद करता है। इस प्रकार, दाले एक अच्छा लो-शुगर भोजन बनती हैं।

इसके अलावा, अलग-अलग दालो में अलग-अलग पोषक तत्व मौजूद होते हैं जिनका आप अलग-अलग इनका सेवन करके लाभ उठा सकते हैं।

हालांकि, कार्बोहाइड्रेट की मात्रा कम होने के कारण दालो को अच्छी तरह से पकाना अति आवश्यक होता है। दाले आपको प्रोटीन और फाइबर से समृद्ध करती हैं, जो आपको लंबे समय तक भरे रहने और आपके शरीर को आवश्यक पोषण की भरपूर मात्रा प्रदान करने में सहायक होते हैं।

मधुमेह के लिए कौन सी दाले अच्छी होती हैं? | शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए?

तो अब तक, हमने साबित किया है कि दाले मधुमेह के रोगी के लिए काफी फायदेमंद होती है। दाले आपकी भूख को पूरा तो करती ही है साथ ही आपके लिए आवश्यक पोषक तत्वों का बढ़िया स्रोत्र भी है लेकिन शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए ?

आइए नीचे दी गई सूची में मधुमेह रोगियों के लिए सर्वोत्तम प्रकार की दालो की ।

ब्लैक दाल / माँ की दाल / उड़द की दाल

उड़द की दाल मधुमेह के रोगी के लिए स्वास्थ्यप्रद विकल्पों में से हैं। वे फाइबर, फोलेट, पोटेशियम और बहुत सारे प्रोटीन जैसे कई अच्छे पोषक तत्वों से भरे हुए हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 43 होता है। साथ ही उड़द की दाल त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद होती है।

लेकिन उड़द की दाल शरीर में गैस पैदा करने वाली होती है इसलिए इसको बनाते समय सौंठ, अदरक, लहसुन, हींग आदि का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।

राजमा

राजमा सबसे लोकप्रिय उपयोग की जाने वाली फलियों में से एक हैं। वे खनिजों से भरी होती हैं जो शरीर के लिए अच्छे होते हैं और स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

राजमा आपको ढेर सारे फाइबर, आयरन और प्रोटीन की आपूर्ति कर सकती है। उसके ऊपर, राजमा में भी अच्छी मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ावा देते हैं। राजमा को उसके ब्लड शुगर को कम करने वाले गुणों के कारण पसंद की जाती है।

हरे चने / मुंग की दाल

हरे चने मधुमेह रोगियों के लिए अच्छे होते हैं और सुरक्षित भी होते हैं क्योंकि उनका ग्लाइसेमिक स्तर केवल 38 होता है।

एंटीऑक्सिडेंट की प्रचुरता इसे मधुमेह रोगियों के लिए आवश्यक बनाती है। मुंग की दाल पोधो से मिलने वाले प्रोटीन का अच्छा स्रोत है और इसके सेवन से शरीर को कई प्रकार के खनिज भी प्राप्त होते है जो मधुमेह समेत अनेक रोगो में फायदा पहुंचाते है।

काले छोले

काले छोले का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 33 होता है। काले छोले में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन्स, आयरन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। मधुमेह के मरीजों को स्वस्थ रहने के लिए इन पोषक तत्वों की अत्यंत आवश्यकता होती है। इसलिए डायबिटीज के मरीज को अपनी डाइट में काले छोले को जरूर शामिल करने चाहिए।

भुने हुए या उबले हुए छोले एक स्वस्थ और स्वादिष्ट विकल्प हैं जो भरपूर मात्रा में फाइबर भी देते हैं।

चना दाल

चना दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 8 होता है। इसमें प्रोटीन और फॉलिक एसिड भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो शरीर में नई कोशिकाओं, विशेष रूप से लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होता है।

अरहर की दाल

अरहर की दाल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है और इसमें प्रोटीन की अलावा आयरन, जिंक, फोलेट और मैग्नीशियम आदि विटामिन्स और मिनरल्स मौजूद होते है। साथ ही इसमें घुलकणषील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर मौजूद होते है। इतनी खूबियों से भरपूर अरहर की दाल शुगर के मरीजों के लिए काफी फायदेमंद होती है।

Disclaimer

सिर्फ मधुमेह यानि शुगर ही नहीं दाले खाने के अनेको फायदे है। आइये जाने है :-

दाले खाने के 10 फायदे

अब तक, हमने लेकिन शुगर में कौन सी दाल खानी चाहिए और दालो के अनेको स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी, लेकिन बीन्स के शरीर पर क्या फायदे हो सकते हैं? आइए जानते हैं

  1. दाल भोजन का कम वसा वाला स्रोत हैं। ये शरीर के वजन को कम नहीं करते हैं बल्कि वजन को मैनेज करने में मददगार होते हैं।
  2. ये आपके दिल को स्वस्थ रखते हैं। दालो में कोलेस्ट्रॉल कम करने वाले गुण होते हैं जो हृदय संबंधी जोखिमों को दूर रखते हैं। घुलनशील फाइबर की मौजूदगी के कारण यह दिल को बेहतर रखने में मदद करते है।
  3. दाले आपको पौधे-आधारित प्रोटीन देते हैं, जो स्वास्थ्यवर्धक है। यह शरीर और उसके कामकाज को बनाए रखने में मदद करता है। यह ऊर्जा का एक स्वस्थ स्रोत भी है।
  4. दालो में बहुत अधिक फाइबर होता है जो उनके कार्बोहाइड्रेट के स्तर को संतुलित करता है। यह शरीर के चयापचय और मधुमेह रक्त शर्करा के स्तर के लिए भी अच्छी होती है।
  5. दालो में मौजूद फाइबर पेट या पेट से संबंधित विकारों जैसे कब्ज, सूजन, ऐंठन, अपच आदि को रोकने में मदद करता है। हालांकि, इन लाभों को प्राप्त करने के लिए, आपको इसका सेवन अधिक नहीं करना चाहिए।
  6. दाल में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कैंसर जैसी आंतरिक और पुरानी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।
  7. दाल स्वस्थ हैं और आपकी भूख को पूरा करती हैं। दाल खाने से आपकी खाना खाने की इच्छा पूरी हो जाती है जिससे आप बेवक्त और बाजार का उटपटांग खाने से बच जाते है। दाल में मौजूद फाइबर बिना कैलोरी बढ़ाए आपको संतुष्ट महसूस कराता है।
  8. दाले आयरन, पोटेशियम, कैल्शियम, आदि जैसे कई पौष्टिक खनिजों में भी समृद्ध हैं। दाल में विटामिन ‘K’ और ‘A’ भी भरपूर मात्रा में होता है। ये संयुक्त रूप से शरीर की प्रतिरक्षा में सुधार करने और बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।
  9. दालो में अच्छी मात्रा में फोलेट होता है जो शरीर में अच्छे रेड ब्लड सेल्स का उत्पादन और कामकाज को नियंत्रित करने में मदद करता है। गर्भावस्था के दौरान भी यह आवश्यक है।
  10. अधिक पौधे-आधारित प्रोटीन होने से फैटी लीवर और उच्च रक्तचाप को रोकने में भी मदद मिल सकती है जिससे स्वास्थ्य संबंधी अनेको समस्याएं हो सकती हैं।

शुगर में कौन सी दाल खाने चाहिए?

शुगर में चना दाल, मुंग की दाल, राजमा, काले छोले, भुने छोले आदि खाना फायदेमंद रहता है क्योकि यह सभी फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होती है।

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