पित्त की पथरी की पूरी जानकारी || पित्त की पथरी के लक्षण, क्या खाये क्या नहीं ||घरेलू आयुर्वेदिक इलाज

पित्ताशय की पथरी की पूरी जानकारी || पित्त की पथरी के लक्षण, क्या खाये क्या नहीं ||घरेलू आयुर्वेदिक इलाज :- 

पित्ताशय की पथरी यानि Gall Stone

पित्ताशय की पथरी और उसका दर्द एक कठिन और भयानक रोग है | आमतौर पर 85 प्रतिशत लोगों के पित्ताशय में यह पथरी चुपचाप पड़ी रहती है । उन्हें इससे कोई कष्ट नहीं होता ।
दोस्तों,

पित्त की थैली की नलिका यानि CBD ( Common Bile Duct ) नलिका का आन्तरिक साइज 6.5 मिलीमीटर से लेकर 7.5 मिलीमीटर तक ही औसतन होता है | किसी-किसी रोगी में CBD का आन्तरिक साइज कुछ घट या कुछ बढ जाता है | इसलिए 7 मिलीमीटर या उससे ज्यादा बड़ी पथरी होने पर ऑपरेशन की सलाह दी जाती है | इस ऑप्रेशन के दौरान रोगी के शरीर से गॉल ब्लैडर यानि पित्ताशय को ही निकलकर बाहर कर दिया जाता है । उस समय रोगी को आराम तो मिल जाता है लेकिन उसकी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है और थोड़े भी वसा युक्त खाद्य पदार्थ वह ग्रहण नहीं कर सकता ।
पित्ताशय निकलवाने के बाद अपच, पेट फूलना, दस्त आदि स्वास्थ्य समस्याओं से सामना करना पड़ सकता है । कुछ लोगो के स्थाई रूप से खाना नहीं पचता है और पेट भो सही नहीं रहता है काफी कमजोर भी आ जाती है | कई बार पित्‍ताशय निकलवाने के कुछ सालों बाद स्‍टोन की समस्‍या फिर से हो सकती है । इसके लिए, आपको हेल्‍दी लाइफस्‍टाइल और डाइट को लेना होगा, तेल-मसाले युक्‍त भोजन से बचें, नियमित रूप से डॉक्‍टर से चेकअप करवाते रहें तथा पर्याप्‍त मात्रा में पानी पिएं ।

हम आपको पित्त की पथरी कैसे बनती है , पित्त पथरी के लक्षण क्या-2 होते है , पित्त की पथरी से बचने के उपाय के बारे में जानकारी देने के साथ साथ पित्ताशय की पथरी की समस्या में क्या खाये क्या नहीं और पित्त की थेली की पत्थरी निकालने का अचूक उपाय या पित्ताशय की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज के बारे में बताने जा रहे है |

पित्ताशय की पथरी

पित्त की पथरी कैसे बनती है ?

गॉल ब्लैडर जिसे हम ‘पित्ताशय’ कहते हैं । यह नाशपाती के आकार का थैलीनुमा अंग होता है जो हमारे यकृत यानि लीवर के ठीक नीचे पाया जाता है । इसी में पित्त (पाचक पित्त) जमा होता है ( यदि आप नहीं जानते तो बता दें कि ‘पित्त’ एक पाचक रस है जो कि लीवर द्वारा बनाया जाता है । यह वसायुक्त पदार्थों को पचाने में मदद करता है ) । जहां से यह छोटी आंत में जाकर पाचन क्रिया में सहायता करता है | पित्ताशय में ही पित्त पथरी का निर्माण करने वाले कोलेस्ट्रोल यानी चर्बी का भी संचय होता है | यह कोलेस्ट्रॉल पित्ताशय में जमा पित्त में घुलनशील होता है परंतु कई बार स्थाई कब्ज, अम्लता यानि एसिडिटी, अनियमित, असंतुलित और जल्दी न पचने वाले भोजन, शराब पीने, नशा करने, मांसाहार, मोटापे, डायबिटीज, आनुवांशिक तथा रक्त संबंधी बीमारियां आदि के परिणाम स्वरुप पाचनक्रिया मंद हो जाने के कारण पित्ताशय में कोलेस्ट्रॉल नहीं घुल पाता जो संचित होकर यानि इकट्ठा होकर दूषित द्रव्य के संयोग से यानि साथ मिलकर पथरी का रूप धारण कर लेता है जिसे पित्त पथरी यानी Gall Stone कहते हैं |

शुरुआत में पथरी बालू के कण की आकृति से दूषित पदार्थों के सहयोग से धीरे-२ बढ़कर बड़े आकार की हो जाती है | छोटे आकार की पथरिया पित्त नली यानी Common Bile Duct की राह से निकल कर आंतो में प्रवेश कर जाती है और मल के साथ निकल भी जाती है और रोगी को उनके होने का पता भी नहीं चलता परंतु बड़े आकार की पथरिया जब पित नली के अंदर प्रवेश करती है तो भयानक कष्ट होता है और जब तक ये पथरिया साधारण पित्त प्रणाली के रास्ते से हट नहीं जाती या आंतों के भीतर नहीं पहुंच जाती, तब तक यह भयानक दर्द होता रहता है | जो पित पथरी शूल यानी Gall Stone Colic कहलाता है |

 

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पित्त पथरी के लक्षण:-

शुरुआत में रोगी को भोजन के बाद पित्ताशय के आसपास बेचैनी सी महसूस होती है | फिर पेट में दर्द नाभि के ऊपर या दाहिने या नीचे की तरफ पित्ताशय के आसपास मालूम होता है | जो हल्का होता है जो अकसर खाना खाने के बाद शुरु होता है और उल्टी होने के बाद ही कुछ आराम मिलता है | रोग अधिक पुराना होने पर खाने में अरुचि होने लगती है और पेट का दर्द भी बढ़ जाता है | पथरी बड़ी होने पर दर्द पेट के पूरे हिस्से में होने लगता है और कभी कभी दाहिने कंधे तक बढ़ जाता है | यह दर्द ऐठन जैसा तेज दर्द होता है जो अचानक आरंभ होता है तथा कुछ घंटों तक बना रहता है | तेज दर्द में उल्टियां भी हो सकती है | पथरी के पित्त नली में अटक जाने से कई बार सिर में चक्कर और तेज बुखार भी आ सकता है | अल्ट्रासाउंड के द्वारा पथरिया की संख्या व स्थिति का पता चल जाता है |

पथरी से बचने के उपाय :-

चाहे पित्ताशय की पथरी हो या गुर्दे की सभी पथरियों की उत्पत्ति का संबंध विभिन्न स्राव की ग्रंथियों यानी Secretion Glands की क्रियाशीलता से होता है | जब गलत आहार-विहार के कारण वात, पित्त और कफ दोष बढ़ने के कारण शरीर की पाचक पाचन प्रणाली तथा स्रावक प्रणाली यानी Secretion System का कार्य सुचारु रुप से नहीं होता, तब दूषित पदार्थ मुत्र आदि में घुलकर निकलने की बजाय गुर्दे या पित्ताशय में संचित होकर मूत्र पथरी या पित्त पथरी का रूप ग्रहण कर लेते हैं | इसलिए खानपान सुधारने तथा ऋतु के अनुसार आयुर्वेदिक तरीके से विरेचन आदि षट्कर्म से शरीर का शोधन यानि अंदर से शरीर की सफाई करते रहना चाहिए | इसे पथरी होने का डर नहीं रहता |

पित्त पथरी के पथ्य-अपथ्य :-

पित्त पथरी में पथ्यापथ्य पालन करने का विशेष महत्व है |
पथ्य :- जो, मूंग की छिलके वाली दाल, चावल, परवल, तुरई, लौकी, करेला, मौसमी, अनार, आंवला, मुनक्का, ग्वारपाठा, जैतून का तेल आदि | खट्टे रसदार फल, मठ्ठा, ताजे शाक, तरबूज, खीरा आदि इस रोग में लेना लाभकारी रहता है | भोजन सादा, बिना तेल वाला तथा आसानी से पचने वाला करें और योगाभ्यास करें |

अपथ्य :– मांसाहार, शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन न करे, उड़द, गेहूँ, पनीर, दूध की मिठाइयां, नमकीन, तीखे, मसालेदार, तले हुए, खट्टे, खमीर उठाकर बनाए गए खाद्य पदार्थ जैसे इडली, डोसा, ढोकला आदि का सेवन न करे, श्वेतसारोर और चर्बी वाले खाद्य पदार्थ जैसे घी, दूध, कैला आदि गूदेदार फल, सूखे मेवे, चीनी, मैदे की चीज़े, तली चीज़े और नशीली चीज़े इस रोग में हानि पहुँचती है | अधिक चर्बी, मसाले व प्रोटीन के सेवन से यकृत और प्लीहा के खराब होने की संभावना बढ़ जाती है और फल स्वरुप रक्त की शुद्धि नहीं हो पाती इसलिए पाचन में भारी खासकर तली हुई और अम्ल बढ़ाने वाली चीजों के सेवन से परहेज रखें और भूख के बिना भोजन ना करें |

पित्त की थेली की पत्थरी निकालने का अचूक उपाय या पित्ताशय की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज

आइए अब आपको पित्त की थेली की पत्थरी निकालने का अचूक उपाय या पित्ताशय की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज इलाज के बारे में बताते हैं :-
सबसे पहले आपको बादाम गिरी 6 नग (pieces), मुनक्का 6 (pieces), मगज खरबूजा 4 ग्राम, छोटी इलायची 2 नग (pieces), मिश्री 10 ग्राम 
| इन पांचों को ठंडाई की तरह बारीक कूट कर आधा कप पानी में मिलाकर छान कर देने से पित्ताशय की पथरी में चमत्कारी लाभ मिलता है |

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