Fructoz || कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना || फैट बढ़ना || ब्लड प्रेशर || फैटी लिवर जैसी बीमारियां का मुख्य कारण और बचाव

फ्रक्टोज़ किस तरीके से शरीर के लिए नुकसानदायक होता है ?

दोस्तों क्या आप जानते हैं कि बढ़ती उम्र के साथ-साथ हमारे शरीर में नुकसानदायक कोलेस्ट्रॉल डी एल डी के स्तर क्यों बढ़ने लग जाता है?

शरीर के चारो तरफ फैट क्यों बढ़ने लग जाती है?

ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर जैसी अनेक बीमारियां हमें क्यों घेर लेती है?

इन सब का मुख्य कारण है फ्रक्टोज़ | यहां पर हम आपको जानकारी देने जा रहे है की

  • फ्रक्टोज़ क्या है ?

  • फ्रक्टोज़ किस तरीके से शरीर के लिए नुकसानदायक होता है ?

  • ऊपर बताई गई बिमारिओ से बचाव के लिए हमें क्या-२ करना चाहिए ?

दोस्तों,
ऊपर बताई गई बिमारिओ से बचाव के बारे मैं जानने से पहले जान ले की फ्रक्टोज़ क्या है और यह किस तरीके से शरीर के लिए नुकसानदायक होता है ?

मीठा सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है | जब हम मीठी चीजो की बात करते हैं तो इसका मतलब मिठाई, केक, पेस्ट्री, कोल्ड ड्रिंक, डिब्बाबंद जूस आदि उन चीजों से हैं जिनमें शुगर मिली होती है | शुगर कार्बोहाइड्रेट है |
दोस्तों,
फल सब्जियों में भी कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं लेकिन इसमें फाइबर अधिक मात्रा मैं होने से फायदा होता है |
दोस्तों,

हमारा शरीर डाइट यानि खान पान के जरिए मिलने वाली शुगर में से ग्लूकोज और फ्रक्टोज पर अलग-अलग ढंग से प्रतिक्रिया करता है | वास्तव में हमारे शरीर की हर कोशिका ग्लूकोस को एनर्जी में परिवर्तित कर सकती है लेकिन फ्रक्टोज को केवल लीवर की कोशिकाएं ही परिवर्तित कर सकती हैं और अगर डाइट में फ्रक्टोज की अधिकता हो तो यह लीवर, धमनियों और दिल के लिए खतरा बन जाता है |

अगर ज़रूरत से अधिक फ्रक्टोज लीवर में जाए तो इससे कई बदलाव आते हैं | इसमें नुकसानदायक कोलेस्ट्रॉल डी एल डी के स्तर का बढ़ना, शरीर के अंगों के चारों तरफ फैट जमा होना व ब्लड प्रेशर बढ़ जाना आदि शामिल है |

इसके अलावा ऊतक इंसुलिन रजिस्टेंस बन जाते हैं | एक तरह से डायबिटीज की शुरुआत हो जाती है | शरीर में फ्री रेडिकल अधिक बनने लगते हैं जोकि डीएनए व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं | इस तरह का कोई भी बदलाव धमनियों और दिल के लिए अच्छा नहीं होता |

आइये जानते है ऊपर बताई गई बिमारिओ से बचाव के लिए हमें क्या-२ करना चाहिए :-

डॉक्टर्स के अनुसार रिफाइंड शुगर, फ्रक्टोज का मुख्य स्रोत है और यह सेहत के लिए नुकसानदायक है | बेहतर यही है कि कम मीठा खाने की आदत बचपन से ही डाली जाए हालांकि बच्चों की डाइट में से मीठी चीजों को निकालना, ठीक, नहीं कहा जा सकता पर इसे कम जरूर किया जा सकता है |

बच्चों को डिब्बाबंद फ्रूट की जगह फल खिलाये, फलों का ताजा जूस या नारियल पानी दे | मीठे दही की जगह घर में बने तरह-तरह के रायते और नाश्ते में ब्रेड-जैम या पास्ता आदि की जगह पराठा-सब्जी दे |

जो खाना साबुत अनाज या मोटे अनाज से बना हो वही खाएं और खिलाएं जैसे रोटी या पराठा | फ्रक्टोज कम लेने के चक्कर में बच्चों की डाइट में से फल कम ना करें |

फल सेहत के लिए अच्छे होते है और इनमें फ्रक्टोज बहुत कम मात्रा में होता है | ताजे जूस से भी बेहतर है की पूरा फल खाए |

अगर गुजिया या गुलाब जामुन जैसी कोई मिठाई खाने का मन करे, तो डाइट में पालक या अन्य सब्जियां या फल भी शामिल करें |

अगर मीठी चीजें फाइबर के साथ खाई जाए तो इन्हें पचाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है तब शरीर को उस तरह के नुकसान नहीं पहुंचता |

तो दोस्तों उम्मीद है यह जानकारी आपको, आपके अपनों को स्वस्थ बनाने के काम आएगी |

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