बुरे समय में ये 2 काम अवश्य करे || Motivational Story in Hindi 3

बुरे समय में ये 2 काम अवश्य करे || Motivational कहानी 3
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बुरे समय में ये 2 काम अवश्य करे

दोस्तों, मुझे अक्सर बहुत से लोग यह पूछते हुए देखे जाते है की मेरा तो समय ही खराब चल रहा है, मुझे नहीं समझ आता की मैं क्या करूं? कैसे अपने बुरे समय को अच्छे समय में बदलू?

सच तो यह है आपको दो चीजें हैं, जो बुरे समय में जरूर करनी चाहिए और बहुत से लोग यही दो चीजें करनी छोड़ देते हैं |

भगवान श्री कृष्ण ने क्या कहा है श्रीमद् भगवतगीता में बुरे समय के बारे में, आज हम यही जानेंगे | पहले मैं आपको एक कहानी सुनाऊंगा, फिर गीता से इसकी जानकारी भी दूंगा | 

बुरे समय में ये 2 काम अवश्य करे || Motivational Story in Hindi 3

चलिए जानते हैं एक कहानी से क्या करना चाहिए हमें अपने बुरे समय में कि हमारा बुरा समय अच्छे समय में बदल जाए |

तो आते हैं पहली कहानी पर

पहली कहानी || in Hindi

एक बार एक बहुत ही गरीब किसान था | वह गरीब तो था पर साथ ही मेहनती था और हमेशा खुश रहता था और रोज सुबह उठकर मंदिर में जाकर भगवान के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करता था |

उस किसान की पत्नी भी हर रोज किसान के साथ मंदिर जाती | दोनों सुबह-२ प्रार्थना करके अपने-२ काम को ईमानदारी से पूरा करने में लग जाते थे | उस किसान का जीवन बहुत ही अच्छा चल रहा था |  अपनी मेहनत की कमाई से वो कुछ ज्यादा तो नहीं कमा पाता था, लेकिन फिर भी जितना कमाता था उसमें भी कुछ पैसे लोगों की भलाई में लगा देता था |

एक बार उनके गांव में बीमारी फैल गई | किसान का इकलौता लड़का बहुत बीमार हो गया | किसान के गांव में इस बीमारी के इलाज के लिए कोई अच्छा डॉक्टर नहीं था इसलिए पास के शहर में उस लड़के को ले जाया गया |

शहर के इस अस्पताल का इलाज बहुत ही महंगा था | उस बेचारे किसान के लिए अस्पताल का और डॉक्टर की दवाइयों का खर्चा आदि दे पाना बहुत मुश्किल था | किसान दिन प्रतिदिन हिम्मत हारता जा रहा था |

1 दिन हस्पताल में बैठे-बैठे वह इतना हताश हो गया कि वो जोर-जोर से रोने लगा और कहने लगा “पता नहीं किस चीज का बदला ले रहे हैं भगवान | “

कभी वो खुद को कोसता तो कभी परमात्मा को | पर किसान की बीवी को परमात्मा पर अटूट विश्वास था | परमात्मा उनको इस मुसीबत की घड़ी में मदद करने जरूर आएंगे | पर किसान को आशा की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी |

अस्पताल के कुछ दूरी पर ही एक मंदिर था | किसान की पत्नी उस मंदिर में हर रोज प्रार्थना करने जाती, पर किसान का दिल प्रार्थना करने को नहीं करता था |

एक दिन डॉक्टर ने किसान से कहा की उसके बच्चे के इलाज के लिए ₹10,000/- की आवश्यकता है |  किसान के लिए इतनी बड़ी रकम इकट्ठा कर पाना असंभव था | किसान की पत्नी मंदिर जाती थी, वह भगवान के आगे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती कि उसका पुत्र ठीक हो जाए |

उसी दिन मंदिर में एक सेठ आया | उसने किसान की पत्नी को कहा कि उसने किसान की बात उस दिन हस्पताल में सुनी थी जिस दिन किसान रो रहा था | सेठ ने बताया उस दिन सेठ की पत्नी भी हस्पताल में थी | वह अब पूरी तरह से ठीक हो गई है और घर चली गई है |

सेठ को बातों ही बातों में पता चला कि किसान को ₹10,000/- की आवश्यकता है तो सेठ ने तुरंत अपनी जेब से पैसे निकाल कर देते हुए कहा की उसके पास इस समय ₹10,000/- ही है और साथ में कागज पर अपना पता लिख कर देते हुए कहा की अगर उनको और पैसों की आवश्यकता हो तो बेहिचक मांग ले |

महिला ने उत्तर दिया “इस कागज की कोई आवश्यकता नहीं है | मैं जानती हूँ की यह पैसे किसने भिजवाए है और जिस परमात्मा ने यह पैसे भिजवाए है वह मेरा हमेशा ख्याल रखेंगे |”

दोस्तों,

इसको कहते हैं अटूट विश्वास | और यही वह जरूरी चीज है जो हम लोग अक्सर खो देते हैं अपने बुरे वक्त में | जो उस औरत ने नहीं खोया | उसने तो सेठ का पता लिखा हुआ कागज भी नहीं पकड़ा, क्योंकि जानती है की परमात्मा उसके साथ सदैव है |

श्री कृष्ण श्रीमद भगवत गीता के ९ वे अध्याय के २२ वे श्लोक में कहते हैं ” जो मेरे पर अपना मन लगाते हैं, मेरा ध्यान करते हैं, मैं उनको वह प्रदान करता हूं जो उनके पास नहीं है | और जो उनके पास है उसकी रक्षा भी करता हूं |”

 

इसलिए यह बहुत जरूरी है कि हम अपने बुरे वक्त में परमात्मा का साथ ना छोड़ |

और दूसरी चीज जो हमें अपने बुरे वक्त में करनी चाहिए, यह जानने के लिए भी एक कहानी सुनते हैं –

दूसरी कहानी || in Hindi

एक बार एक राजा था | उस राजा के दो पुत्र थे | बड़ा पुत्र बहुत ही लालची और बहुत ही घमंडी था | इसके विपरीत छोटा पुत्र बहुत ही आज्ञाकारी था |

राजा की अकस्मात मृत्यु हो गई | बड़ा भाई हमेशा ही अपने छोटे भाई से लड़ता रहता था | दोनों के बीच में लड़ाई न हो इसलिए दोनों ने यह तय किया की दोनों अपने-अपने राज्यों की सीमा तय कर लेंगे और एक दूसरे के राज्य में कभी दखल नहीं देंगे |

राज्य में एक नदी पड़ती थी | इस नदी से ही राज्य के सभी लोगों को पानी पहुंचता था | एकलौती नदी का पानी बड़ा भाई किसी भी कीमत पर अपने छोटे भाई को देने को तैयार नहीं हुआ और स्थिति दोनों भाइयों में युद्ध तक पहुंच गई |

दोनों भाई एक महात्मा को बहुत मानते थे | दोनों ने युद्ध से पहले उन महात्मा का आशीर्वाद लेने की सोची |  महात्मा ने बड़े भाई से कहा युद्ध में जीत उसी की होगी और छोटे भाई को भी साफ साफ कहा उसकी हार निश्चित है |

छोटा भाई पहले यह सुनकर थोड़ा घबराया और लेकिन उसने सोचा अगर हारना ही किस्मत में लिखा है तो क्यों ना युद्ध लड़ कर हारू ताकि लोग मिसाल दे की क्या युद्ध लड़ा था इसने |

उधर बड़ा भाई निश्चित हो गया की जीत उसी की होगी | छोटा भाई यह सोचकर लड़ रहा था की किस्मत में हार लिखी है तो भी कोई बात नहीं, मैं बिना लड़े हार नहीं मानूंगा और बड़ा भाई यह सोचकर लड़ रहा था तो उसकी जीत तो निश्चित है तो घबराना किस बात का |

लड़ते-लड़ते बड़े भाई के घोड़े की नाल निकल गई, पर बड़ा भाई तो यह सोचकर लड़ता रहा की जब भाग्य में जीत लिखी है तो किस बात की चिंता | थोड़ी देर बाद घोड़ा लड़खड़ाकर गिर गया और जीत हुई छोटे भाई की |

हम लोग भी सबसे बड़ी गलती यही करते हैं, बुरे वक्त में हम लोग कर्म करना ही छोड़ देते हैं |

श्रीमद भगवत गीता के २ वे अध्याय के ३३ वे श्लोक में श्री कृष्ण कहते हैं “अर्जुन युद्ध नहीं लड़ोगे तो तुम अपने धर्म और कीर्ति से भ्रष्ट होकर पाप के भागी बनोगे |”

इसलिए हमें अपने बुरे वक्त में कभी भी हार मानकर नहीं बैठना है बल्कि साहस करके अपने कर्तव्य को पूरा करना है | हमें यह नहीं सोचना कि हमें फल नहीं मिल रहा, बस कर्म करते जाना है |

और हां सबसे अच्छी बात श्रीमद भगवत गीता के दूसरे अध्याय के १४ वे श्लोक में श्री कृष्ण कहते हैं “सुख और दुख का भाव इंद्रियों से उत्पन्न होता है | यह सर्दी और गर्मी की ऋतु यानी मौसम के समान है यानि यह सुख और दुख दोनों ही सदैव नहीं रहेंगे |”

श्री कृष्ण कहते हैं “हमें सुख और दुख दोनों को बिना घबराए समान भाव से सहन करना चाहिए |”

तो मैं उम्मीद करता हूं की दुःख के क्षण में आप, अपने पर और परमात्मा पर विश्वास रखेंगे |

जय श्री कृष्ण

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