और उसका सेवन करने के 4 तरीके || की छाल के नुकसान :-

के पेड़ की छाल के चूर्ण पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में किये गए एक अध्ययन से पता चला कि इसके सेवन से दिल के रोगों से ग्रस्त रोगी पूरी तरह ठीक हो सकते हैं | 90% धमनिया बंद हो चुके रोगी भी इसके सेवन से पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं | हृदय रोगों के साथ-साथ हाई बीपी यानी उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय शूल यानी एनजाइना, रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करने, तेज धड़कन को कंट्रोल करने के लिए की छाल के चूर्ण का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद सिद्ध हुआ है |
की छाल हाई BP, कोलेस्ट्रोल, ट्राईग्लिसाराईड को ठीक करती है, मोटापा कम करती है, हार्ट में अर्टेरिस में अगर कोई ब्लोकेज है तो वो ब्लोकेज को भी निकाल देती है । कमजोर दिल वालो के लिए अमृत के समान है की छाल |

एक वृक्ष का नाम है | इसके पत्ते जामुन के पत्तों की तरह होते हैं और इसमें छोटा सा फल कमरख जैसा लगता है | तना भी लगभग जामुन से मिलता जुलता होता है | दिल्ली में यह वृक्ष खूब मिलता है | इसकी छाल तने के ऊपर लगभग डेढ़ इंच तक मोटी होती है | छाल का काढ़ा या चाय बनाकर पीने से रक्तचाप कम हो जाता है, रक्त का बहाव सुचारु रुप से नसों में होने लगता है, रक्त पतला हो कर हृदय को भाती प्रकार से पहुंचता है | इसके पीने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनता जिससे रक्त को धमनियों में हृदय तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं आती तथा इसका सेवन हृदय को शक्ति प्रदान करता है | आइए अब आपको की छाल 4 अलग-अलग तरीकों से प्रयोग करने की विधि के बारे में बताते हैं |

1) दूध में घोलकर :-

के पेड़ की भीतरी लाल रंग की छाल को छाया में सुखा ले | फिर उसे कूटकर उस का चूर्ण बनाकर किसी साफ शीशी में भरकर रख लें | एक छोटी चम्मच के बराबर मात्रा में सुबह और शाम को दूध के साथ या दूध में मिलाकर इसे लिया जा सकता है | इससे हृदय में शक्ति आने के साथ-साथ शरीर का बल भी बढ़ता है | कुछ चिकित्सक की छाल का 2 छोटी चम्मच चूर्ण एक कप हल्के गर्म दूध में घोलकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर सुबह खाली पेट दिन में एक बार लेने की सलाह भी देते हैं | इसके सेवन से शरीर में सक्रियता और स्फूर्ति बनी रहती है |

2) चाय के रूप में :-

आधा या एक चौथाई चम्मच की छाल का चूर्ण चाय बनाते समय इसमें डालकर उबाल लें | फिर चाय की पत्ती डालकर उबालें | ऐसी चाय के रुप में भी की छाल के चूर्ण का सेवन किया जा सकता है |
रोजाना प्रातः यानी सुबह-सुबह हृदय रोग जिसमे मिट्रल वाल्व ढीला पड़ जाता है, उच्च रक्तचाप या एंजाइना की बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के लिए की छाल को पीसकर बनाए हुए चूर्ण में से आधी छोटी चम्मच चाय बनाते समय चाय के साथ उबालकर उस चाय का प्रयोग बहुत ही लाभदायक सिद्ध होता है |

इसके सेवन से इस तरह की छाल की चाय बनाकर 108 वर्ष की होगी जिनके डैमेज वालों की जगह भालू की जगह नया बाल उगाने की आवश्यकता थी रक्त हीनता और लो बीपी के कारण अधिक कमजोरी भी थी और बालू का ढीलापन भी अधिक नहीं था इसलिए ऑपरेशन नहीं करवाया जा सकता था जिनकी आयु 68 वर्ष है उन्होंने उपरोक्त विधि से विधि से की छाल की चाय बनाकर की चाय बनाकर 2 वर्षों से रोजाना प्रातः यानी सुबह सुबह लेने के बाद डॉक्टर से चेकअप कराने पर पता चला कि उनके हृदय का वाल्व ठीक हो गया है और ऑपरेशन की कोई जरूरत ही नहीं है की चाय के सेवन से पहले उसने से पहले उसने हाथ ही पकड़ बिस्तर पर ही सही पकड़ लिया था और उन्हें पंखा चलने से पसीना आना खिड़की खुलने से थरथराहट और पांव में सर्दी रेंगती हुई जान पड़ती थी 15 मिनट बोलने से थकावट हाथ पर चीज रखने से हृदय खींचने जैसी घबराहट आदि लक्षणों का अनुभव होता था उनका की छाल के चूर्ण के प्रयोग से रक्तचाप भी सामान्य हो गया एक अन्य रोगी ने भी अपनी अपने अनुभव हमसे शेयर किए उन्हें उच्च रक्तचाप और हृदय सुधियानी एंजाइना की बीमारी से पीड़ित की छाल को पीसकर बनाए हुए चूर्ण में से आधी छोटी चम्मच चाय बनाते समय चाय के साथ बाल कथाएं का प्रयोग कई साल से लाभ कई साल से कर रही हैं और उन्हें इस से बहुत लाभ भी है
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तीसरी विधि -> की ताजा छाल का प्रयोग :-

लगभग 10 ग्राम की छाल को 250 ग्राम पानी में उबालें और साथ में एक छोटी हरी इलायची डाल दे | जब पानी सुखकर लगभग 100 ग्राम रह जाये तो उसमे दूध डाल दे | यदि चीनी का उपयोग ना करें तो अधिक अच्छा है उसके बदले मिश्री डाल सकते हैं | परंतु मिश्री को उबलते हुए मिश्रण में ना डालें, इस मिश्रण को चूल्हे से उतार कर उसमें मिश्री मिलाये | दूध और मिश्री अपनी इच्छा अनुसार और स्वादानुसार डाले |
इसको पीने से रक्त का बहाव सुचारु रुप से नसों में होता है और रक्त पतला होकर हृदय को भली प्रकार से पहुंचता है | इसको पीने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनता जिससे रक्त को धमनियों से हृदय तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं आती और इसका सेवन हृदय को शक्ति प्रदान करता है |

का सेवन श्री क्षेत्रपाल रस्तोगी शकरपुर दिल्ली
उन्होंने बताया कि हार्ट अटैक होने के बाद लगातार तीन साल तक उन्होंने इस तरह से की छाल का प्रयोग किया और उन्होंने यह भी एडवांस लो बी पी वालों को इस तरह से की छाल का प्रयोग नहीं करना चाहिए उन्होंने आगे बताया इसको पीने से रक्त का बहाव सुचारु रुप से नसों में होता है और रक्त पतला होकर हृदय को भली प्रकार से पहुंचता है इसके पीने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल नहीं बनता जिससे रक्त क्यों रक्त को धमनियों से हृदय तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं आती और इसका सेवन हृदय को शक्ति प्रदान करता है
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चौथी विधि :- बिना चायपत्ती डाली की छाल के चूर्ण से की चाय बनाना :-

चाय बनाते समय पानी में चाय की पत्ती के स्थान पर आधा चम्मच की छाल का चूर्ण डालकर, कुछ देर उबालने के बाद उसमें दूध, खांड या चीनी आवश्यकता अनुसार मिलाकर, के चूर्ण की चाय बनती है | नित्य यानी रोज ऐसी चाय का एक बार सेवन करने से हृदय रोग नियंत्रण में रहता है |
की छाल का सेवन बताया उनके बताए अनुसार एक चम्मच की छाल पानी में डालकर खूब आरती जब आधा पानी रह जाता था तो उसमें दूध डालकर पी थी थी उससे मेरी धड़कन बिल्कुल नॉर्मल हो गई
दिल में इतना दर्द, हार्ट एनलार्जमेंट की बीमारी

इस तरह से की छाल की चाय के सेवन से श्री बद्री प्रसाद अरोड़ा दिल्ली वालों ने अपने अनुभव शेयर किए वह कहते हैं कि मुझे 8 साल से हार्ट की तकलीफ थी जयप्रकाश नारायण अस्पताल में डॉक्टर इलाज करवाया उससे फर्क नहीं पड़ा ईसीजी करवाने पर हाथ का नुक्स मालूम होता है दिल में इतना दर्द होता था कि 10 से 20 कदम भी चलने में दर्द उठ जाता था चलने में बहुत तकलीफ होती थी 10-12 कदम चल कर आधे घंटे के लिए बैठना पड़ता था तब उन्हें कविराज आशुतोष मुखर्जी जी ने की छाल का प्रयोग बताया उन्होंने चाय पीना बंद कर दिया और साधना की छाल की चाय यानी की चाय चाय की जगह पर की छाल की चाय दो बार पीना चालू किया शुरू किया की छाल एक चम्मच डालकर एक समय लेता 4 महीने तक सेवन करने के बाद अब मैं खूब चलता फिरता हूं और अपना सारा काम ढूंढकर करता हूं
सावित्री अरोड़ा फतेहपुरी दिल्ली वालों ने शेयर किया कि मुझे हार्ट एनलार्जमेंट की बीमारी 3 साल से चल रही थी ग्वालियर डॉक्टर को दिखाया था दिल्ली में डॉक्टर को दिखाएं मेरी धड़कन थी कि मुझे बहुत तकलीफ होती थी और इतनी परेशानी हो जाती थी कि अपना सारा कपड़ा उतार देती थी तब जाकर चैन मिलता था फिर भी मुझे आराम नहीं मिलता था मैंने कभी रामेश्वर दास जी से परामर्श किया उन्होंने की छाल का सेवन बताया उनके बताए अनुसार एक चम्मच की छाल पानी में डालकर खूब आरती जब आधा पानी रह जाता था तो उसमें दूध डालकर पी थी थी उससे मेरी धड़कन बिल्कुल नॉर्मल हो गई अब घर में घर के काम में और बाहर जाने में कोई परेशानी नहीं होती और मैं पहले से ठीक हूं इसी तरह कुछ अन्य लोगों ने भी अपने अनुभव शेयर किए

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वृक्ष के छाल के नुकसान :-

1) की छाल में ऐसे तत्त्व होते हैं, जो रक्तचाप और रक्त में शक्कर की मात्रा को निर्धारित करते हैं | मधुमेह या उच्च रक्तचाप के रोगी को इसका अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए अन्यथा शुगर लेवल्स अचानक नीचे आ जाएंगे, जिससे आप कोमा में भी जा सकते है.
2) गर्भवती महिलाएं की छाल के उपयोग में सावधानी बरतें.
3) जिन लोगो को निम्न रक्तचाप की परेशानी है उन्हें का उपयोग नहीं करना चाहिए |

आयुर्वेदिक औषधि खाने से पहले किसी चिकित्सक से परामर्श लें | इसके प्रयोग के बाद अगर आपको किसी तरह की परेशानी महसूस हो तो तुरंत ही इसका सेवन बंद कर दें |

अर्जुन की छाल के फायदे और उसका सेवन करने के 4 तरीके || अर्जुन की छाल के नुकसान

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