क्या अर्जुन की छाल ब्लड प्रेशर [Low or High] में है फायदेमंद

अर्जुन की छाल ब्लड प्रेशर

गलत खानपान की वजह से आजकल हर कोई मधुमेह या ब्लड प्रेशर [ उच्च रक्तचाप या निम्न रक्तचाप ] की समस्या से पीड़ित है। इन दोनों समस्याओ से बचाव और उनके निदान में अर्जुन की छाल काफी फायदेमंद सिद्ध हो सकती है। अर्जुन की छाल शुगर यानि मधुमेह में किस तरह फायदेमंद हो सकती है इसकी जानकारी हमने अपने पिछले लेखो में दी है। अर्जुन की छाल ब्लड प्रेशर में किस तरह फायदेमंद हो सकती है इसकी जानकारी आपको इस लेख में मिल जायगी।

आपके शरीर के लिए एक Normal blood pressure reading किसी एक आधार पर तय नहीं की जाती इसके लिए आपके Medical History, आयु, सम्पूर्ण शरीर की स्थिति की जानकारी आवश्यक होती है |

आमतौर पर एक नार्मल स्वस्थ व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 90/60 और 120/80 MM Hg के बीच होता है |

Hypotension || Low Blood Pressure || निम्न रक्तचाप

अगर ब्लड प्रेशर की रीडिंग ऊपर बताई गई रीडिंग से कम आती है तो इस स्थिति में व्यक्ति निम्न रक्तचाप, Low BP या हाइपोटेंशन से पीड़ित माना जाता है |

लो ब्लड प्रेशर होने के कारण

हाइपोटेंशन यानि Low BP की समस्या ज्यादातर उन लोगों में होती है जो अपने खान पान का सही से ध्यान नहीं रखते, नियमित समय पर खाना नहीं खाते, अपने भोजन में पूरे पोषण का ध्यान भी नहीं देते, फिजिकली कम Active रहते हैं और ज्यादातर एक ही जगह पर बैठकर ज्यादा समय बिताते हैं।

इसके साथ ही अनियमित खानपान और low blood sugar, थायराइड की समस्या, दिल की बीमारी, शरीर में खून की कमी और तनाव आदि जैसी स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानिया भी ब्लड प्रेशर के लौ होने का कारण बनती हैं।

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Hypertension (हाइपरटेंशन) || उच्च रक्तचाप

Hypertension (हाइपरटेंशन) जिसे उच्च रक्तचाप व हाई बीपी के नाम से भी जाना जाता है, का मुख्य कारण अधिक तनाव और अनियंत्रित खानपान होता है। वैसे तो हाई बीपी की समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है, लेकिन आमतौर पर यह घर से दूर रहने वालों में ज्यादा होती है या फिर उम्र के बढ़ने के साथ-२ होती है। अधिकतर यह 30 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुष और महिलाएं दोनों को प्रभावित करती हैं।

हाई बीपी की समस्या होने पर शरीर की धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ जाता है। रक्त की धमनियों में रक्त का इस बढ़े हुए प्रवाह को बनाए रखने के लिए हमारे दिल को अधिक कार्य करना पड़ता है और अगर इस दबाव को नियंत्रित न किया जाये तो हृदयरोग और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याए उत्पन्न हो सकती है।

सामान्यतः 140/90 से ऊपर के रक्तचाप को हाइपरटेंशन कहा जाता है। जबकि, 180/120 से ऊपर के दबाव को खतरनाक माना जाता है।

हेल्थ गाइडलाइन्स के मुताबिक 130/80 mmHg तक की रक्तचाप यानि बीपी की रीडिंग से अधिक दबाव होने पर व्यक्ति हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर का शिकार बन जाता है और यदि यह रीडिंग 180/120 से ऊपर से ऊपर पहुंच जाती है तो स्तिथि को बहुत खतरनाक माना जाता है। वैसे तो हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होने पर शरीर के किसी भी अंग प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुकसान हृदय यानि दिल को होता है। आइए, जानते हैं की हाई बीपी यानि हाइपरटेंशन होने के मुख्य कारण कौन-२ से हो होते है –

उच्च रक्तचाप के कारण

उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी [ हाइपरटेंशन] के कारण

  • बढ़ती उम्र
  • नींद की कमी
  • वजन बढ़ना
  • अत्यधिक गुस्सा
  • नॉनवेज, मुख्यत रूप से रेड मीट का अधिक सेवन
  • तैलीय पदार्थों, फ़ास्ट फ़ूड और अस्वस्थ भोजन का सेवन

हाइपरटेंशन यानि हाई बीपी की मुख्य कारण है।

उच्च रक्तचाप के लक्षण

वैसे तो उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी के कोई खास लक्षण नहीं होते फिर भी कुछ साधारण लक्षण होने पर उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी की पहचान की जा सकती है। जैसे –

  1. उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी की स्थिति में व्यक्ति को शुरुआत में तेज सिरदर्द और गर्दन में लगातार दर्द रह सकता है।
  2. उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी के रोगी को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।
  3. रक्‍तचाप बढ़ने पर व्यक्ति को देखने में दिक्कत होने लगती और धुंधला दिखने लगता है।
  4. समस्या की अधिक बढ़ने पर उच्च रक्तचाप यानि हाई बीपी के रोगी को पेशाब के साथ खून निकलने की भी समस्या हो सकती है।
  5. उच्‍च रक्‍तचाप होने पर सिर चकराना, थकान और सुस्ती जैसे लक्षणों भी दिखाई देने लगते है।
  6. कई बार रात में नींद न आने के साथ दिल की धड़कनों के बढ़ जाने की भी समस्या होती है।
अर्जुन की छाल ब्लड प्रेशर

अर्जुन की छाल

अर्जुन एक वृक्ष का नाम है | जिसकी छाल अपने औषधीय गुणों के लिए विश्व भर में मशहूर है। इसकी छाल लगभग डेढ़ इंच मोटी हो सकती है | इसमें एंटीऑक्सिडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं और इसी कारण इस छाल का इस्तेमाल कई बीमारियों का इलाज करने के लिए हमेशा से किया जाता रहा है। इस छाल को अर्जुन की छाल या अर्जुन के पेड़ की छाल के नाम से जाना जाता है।

अर्जुन की छाल की तासीर

अर्जुन के पेड़ की छाल दिल से जुड़ी बिमारिओ से बचाव करने के साथ-२ उनका इलाज करने में भी मदद करती है। ज्यादातर इस छाल का इस्तेमाल पाउडर के रूप, काढ़े के रूप में या फिर चाय के रूप में भी किया जाता है।

अर्जुन की छाल के फायदे

अर्जुन की छाल का काढ़ा या चाय बनाकर पीने से रक्तचाप (Blood Pressure) नियंत्रण में रहता है, रक्त पतला हो कर सुचारु रुप से नसों बहता है और हृदय को भाती प्रकार से पहुंचता है, रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल नहीं बनता जिससे रक्त को धमनियों में हृदय तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं आती । इतना ही नहीं इसके सेवन से आपके हार्ट, ब्रेन और मसल्स को ताकत मिलती है ।

यह तक की 90% धमनिया बंद हो चुके रोगी भी इसका सेवन करने के बाद पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं | हृदय रोगों के साथ-साथ हाई बीपी यानी उच्च रक्तचाप, मधुमेह यानि डायबिटीज, हृदय शूल यानी एनजाइना, तेज धड़कन को कंट्रोल करने के लिए और वजन कम करने के लिए भी अर्जुन की छाल के चूर्ण का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद होता है | साथ ही इसका सेवन डायरिया जैसी कई पाचन संबंधी परेशानियों भी दूर भाग जाती है।

क्या अर्जुन की छाल ब्लड प्रेशर में है फायदेमंद

अर्जुन की छाल फॉर हाई ब्लड प्रेशर

हाई ब्लड प्रेशर की समस्या में अर्जुन की छाल रामबाण मानी जाती है। इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं हाई बीपी वालों के लिए, हाइपरटेंशन वालों के लिए बहुत फायदेमंद है | इतना ही नहीं, हाई बी.पी. के कारण होने वाले सिरदर्द या स्ट्रेस को भी यह दूर करने में फायदेमंद होती है।

  • लगभग 5 ग्राम चूर्ण को 200 ग्राम पानी में तब तक उबालें जब तक की वह पानी उबल-२ कर लगभग 50 ग्राम रह जाये। तब इस बचे हुए पानी यानि इस काढ़े को छानकर पीने से हाई ब्लडप्रेशर नियंत्रण में रहता है |
  • अर्जुन की छाल के चूर्ण को चाय बनाते समय उसमे डालकर, उबालकर पीने से हृदय और उच्च रक्तचाप यानि हाई ब्लड प्रेशर की समस्याओं में तेजी से फायदा मिलता है। चाय बनाते समय एक चम्मच इस चूर्ण को डाल दें। इस प्रकार से बनी हुई अर्जुन की चाय पीने से उच्च-रक्तचाप सामान्य हो जाता है।
  • चाय बनाते समय चायपत्ती की जगह अर्जुन की छाल का चूर्ण ( 1 ग्राम ) एक कप पानी में खौलाया जाए, फिर उसमें दूध व चीनी आवश्यकतानुसार मिलाकर पीने से हाई ब्लड प्रेशर में फायदा होता है।

लो ब्लड प्रेशर में अर्जुन की छाल

जैसा की हम ऊपर बता चुके है की अर्जुन की छाल शरीर में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को नियंत्रित कर सकती है जिस कारण धमनिओ में ब्लॉकेज की सम्भावना खत्म हो जाती है और खून धमनियों में बिना किसी रुकावट के विचरण करने लगता है। इतना ही नहीं इसमें रक्त यानि खून को पतला करने वाले गुण भी पाए जाते है। ऐसे में Low Bp में अर्जुन की छाल का सेवन करना थोड़ा खतरनाक हो सकता है। फिर भी अगर कोई लो ब्लड प्रेशर में इसका सेवन करना सही समझता है तो उसे एक बार अपने चिकित्सक या वैद्य की सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।

अर्जुन की छाल से क्या क्या फायदा होता है?

अर्जुन की छाल का काढ़ा या चाय बनाकर पीने से रक्तचाप (Blood Pressure) नियंत्रण में रहता है, रक्त पतला हो कर सुचारु रुप से नसों बहता है और हृदय को भाती प्रकार से पहुंचता है, रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल नहीं बनता जिससे रक्त को धमनियों में हृदय तक पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं आती । इतना ही नहीं इसके सेवन से आपके हार्ट, ब्रेन और मसल्स को ताकत मिलती है ।
यह तक की 90% धमनिया बंद हो चुके रोगी भी इसका सेवन करने के बाद पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं | हृदय रोगों के साथ-साथ हाई बीपी यानी उच्च रक्तचाप, मधुमेह यानि डायबिटीज, हृदय शूल यानी एनजाइना, तेज धड़कन को कंट्रोल करने के लिए भी अर्जुन की छाल के चूर्ण का प्रयोग बहुत ही फायदेमंद होता है | साथ ही इसका सेवन डायरिया जैसी कई पाचन संबंधी परेशानियों भी दूर भाग जाती है।

अर्जुन की छाल का प्रयोग कैसे करें?

ज्यादातर इस छाल का इस्तेमाल पाउडर के रूप, काढ़े के रूप में या फिर चाय के रूप में भी किया जाता है।

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